आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ कंप्यूटिक एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के सहायक प्रोफेसर वरुण दत्त ने बताया कि इस सिस्टम को भूस्खलन संवेदनशील इलाकों में लगाया जाएगा। इसमें पांच सेंसर नोड स्थापित किए गए हैं।
उपकरण में एक्सलरोमीटर सेंसर रफ्तार, फोर्स सेंसर गीली मिट्टी के भार, नमी मापने के लिए एक मॉयस्चर सेंसर लगाया गया है। प्रत्येक सेंसर नोड में मिट्टी की चाल, नमी तथा मिट्टी पर लगने वाले बल को रिकार्ड किया जाता है।
एक्सलरोमीटर जमीन में कंपन होते ही लाल बत्ती को जला देगा और हूटर स्वत: बज उठेगा।
वर्तमान में आईआईटी मंडी के विद्यार्थी शुभम अग्रवाल, प्रवीण कुमार, गणेश गुप्ता, अंकुश पठानिया, नरेश माली, कपिल अग्रवाल, प्रतीक चतुर्वेदी, प्रोफेसर डॉ. वरुण दत्त और डॉ. उदय के नेतृत्व में इस उपकरण को और बेहतर बनाने में जुटे हैं।
इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने में हिमाचल प्रदेश राज्य विज्ञान, तकनीकी एवं पर्यावरण परिषद (डीटीआरएल), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) का भी सहयोग रहा है।
उपकरण पेटेंट होने पर केंद्र और प्रदेश सरकार के सहयोग से आईआईटी मंडी के मेक इन इंडिया योजना के तहत चल रहे कैटलिस्ट इंक्यूबेटर में उपकरण तैयार होंगे।
यह उत्पाद किस्तों पर महज 1000 रुपये मासिक पर भी लिया जा सकेगा। उपकरण को ईजाद करने वाले विद्यार्थी एक कंपनी बनाकर इस उत्पाद को बड़े स्तर पर तैयार करेंगे।