परिणाम घोषित करने के दो दिन बाद ही 12 अक्तूबर को आचार संहिता लग गई और भर्ती की अगली प्रक्रिया लटक गई। नई सरकार ने सत्ता में आते ही प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग और लोक सेवा आयोग के बाहर की गई भर्तियों पर रोक लगा दी।
सरकार ने पुलिस भर्ती में इंटरव्यू के संदर्भ में विधि विभाग को पुलिस भर्ती से संबंधित फाइल भेजी। इस पर अब तक कोई स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। तीन महीने बीत जाने के बाद भी सरकार अब तक पुलिस भर्ती के संदर्भ में कोई फैसला नहीं ले पाई है ।
पुलिस भर्ती संघर्ष समिति के मनीष सुमन ने बताया कि 20 फरवरी को उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिलकर यह मांग की थी कि भर्ती प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाए। सीएम ने आश्वासन दिया था एक माह के भीतर भर्ती पर स्थिति स्पष्ट कर दी जाएगी, लेकिन अब तक कोई कदम नहीं उठाए गए हैं।
पुलिस भर्ती से रोक नहीं हटाई तो आक्रोश रैली
पुलिस भर्ती को लेकर युवाओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पुलिस भर्ती संघर्ष समिति के मनीष सुमन, विकास ठाकुर, साहिल, बलबीर, हितेश चौहान, विकास, रणधीर, युगल, जीतराम, मोहित, मनोज चंदेल, गौरव चंदेल, दीक्षित, संदीप कुमार और सुशील कुमार ने कहा कि 27 मार्च को होने वाली कैबिनेट मीटिंग में सरकार ने पुलिस भर्ती से रोक हटाकर अगली प्रक्रिया को मंजूरी नहीं दी तो 16 अप्रैल को आक्रोश रैली निकाली जाएगी।
तीन महीने से कौन सी कानूनी राय?
पुलिस भर्ती संघर्ष समिति के मनीष सुमन ने कहा कि पुलिस भर्ती लिखित परीक्षा का परिणाम आए हुए छह माह बीत चुके हैं। सरकार ने पहले भर्ती पर रोक लगा दी और अब यह कहा जा रहा है की इंटरव्यू करवाने को लेकर कानूनी राय ली जा रही है। तीन महीने से सरकार कौन सी कानूनी राय ले रही है। अब तक हुई केबिनेट मीटिंग में किसी नई भर्ती को भी मंजूरी नहीं दी गई है।