जिला उपभोक्ता आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में सुनाया फैसला, मानसिक कष्ट के लिए कंपनी को 50 हजार मुआवजा भी देना होगा
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कंपनी को 45 दिन में करना होगा राशि का भुगतान
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने राजधानी के बीसीएस निवासी केआर शर्मा के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी को 50,00,000 (50 लाख) का भुगतान करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कंपनी को मानसिक कष्ट के लिए 50,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 25,000 रुपये देने होंगे।
शिकायतकर्ता के अनुसार उनका फ्लैट और उसमें रखी संपत्ति 30 सितंबर 2021 को भारी बारिश के कारण आए भूस्खलन में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके लिए उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद कंपनी ने मुआवजा देने में देरी की और मामूली राशि का ऑफर पेश किया। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड कंपनी ने दावा किया कि फ्लैट का मालिकाना अधिकार साबित करने वाले दस्तावेज बिक्री पत्रक (सेल डीड) प्रस्तुत नहीं किए थे। इस कारण दावे को निपटाया नहीं जा सका। आयोग ने इस दावे को उचित नहीं माना और कहा कि शिकायतकर्ता ने पॉलिसी लेने के समय सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। आयोग ने स्पष्ट किया कि फ्लैट पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ और इंश्योरेंस पॉलिसी की शर्तों के अनुसार पूरा मुआवजा मिलना चाहिए। कंपनी को आदेश का पालन 45 दिन के भीतर करना होगा।
यह है पूरा मामला
केके शर्मा ने एजेंट-ब्रोकर के जरिये फ्लैट का बीमा करवाया था। पॉलिसी 6 अगस्त 2019 से 5 अगस्त 2022 तक थी। इसमें बिल्डिंग के लिए 40 लाख और अन्य सामान के लिए 10 लाख रुपये की इंश्योरेंस राशि शामिल थी। इसलिए पॉलिसी के तहत कुल इंश्योर्ड रकम 8,998 के प्रीमियम अमाउंट के मुकाबले 50 लाख रुपये थी। दुर्भाग्यपूर्ण 30 सितंबर 2021 को हुए लैंड स्लाइड में भवन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। इस बारे में पुलिस के साथ बीमा कंपनी को भी सूचना दी गई थी। फ्लैट की मार्केट वैल्यू के हिसाब से नुकसान 58,46,500 रुपये का हुआ। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि कंपनी ने किसी न किसी बहाने क्लेम के सेटलमेंट में देरी की और असली दावा नहीं भरा। कानूनी नोटिस देने के बाद भी कंपनी की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। इसलिए कंपनी के खिलाफ यह शिकायत की गई।