अब तक किसानों के साथ जमीन अधिग्रहण को लेकर रेट तय नहीं हो सका है। देरी के कारण प्रोजेक्ट की लागत बढ़ रही है। इसके मद्देनजर सोमवार को अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त एवं प्लानिंग अनिल खाची ने उपायुक्त सोलन और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक की।
बैठक में तय हुआ कि अगर किसान जमीन के रेट को लेकर नहीं मान रहे तो सरकार जमीन अधिग्रहण के लिए मुआवजा राशि खुद तय कर अनिवार्य आधार पर भूमि का अधिग्रहण करेगी।
इसके लिए डीसी सोलन को अधिग्रहीत होने वाली कुल निजी भूमि का रेट तय करने के लिए भी निर्देश दे दिए गए हैं। प्रोजेक्ट के तहत कुल 25 किलोमीटर लंबी रेल लाइन व इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण होना है।
इसमें सात किलोमीटर में हिमाचल और अन्य 18 किलोमीटर में हरियाणा के लोगों की जमीन आएगी। इसके लिए कुल 323 बीघा जमीन की जरूरत पड़ेगी। वर्तमान में 53 बीघा सरकारी जमीन तो उपलब्ध है, लेकिन बाकी बची 270 बीघा जमीन निजी मालिकों की है।