मंदिर के मुख्य गेट पर पहले ही ताला लगा दिया गया था। वजह पूछी गई तो ग्रामीणों ने रीति-रिवाजों और नियमों की दुहाई दी और कहा कि मंदिर में प्रवेश बंद कर दिया गया है। लेखकों ने मांग की है कि इस भव्य ऐतिहासिक मंदिर परिसर को तत्काल सरकार अपने अधीन लेकर पुरातत्व विभाग को सौंप दे।
मंदिर कमेटी बलग के अध्यक्ष प्रेमदत्त शर्मा ने बताया कि देव समाज के नियमों के अनुसार मंदिर में हर समय सभी के प्रवेश की अनुमति नहीं है। गांव के लोगों को भी मंदिर में जाने की अनुमति नहीं है।
केवल साल में एक बार उत्सव के दौरान मंदिर कमेटी के सदस्य ही इसमें प्रवेश करते हैं। इसके बाद मंदिर में हमेशा ताला लगा होता है। फिलहाल, पुजारी को ही अंदर जाने की अनुमति है।