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जेल, जहां आजादी के बाद नहीं रखे जाते कैदी

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हिमाचलियों में सरफरोशी की अलख जगाने वाले लाला जी की कुर्सी धर्मशाला जेल के बी ग्रेड के सेल नंबर 2 में आज भी सलामत है। आजादी के बाद इस सेल में किसी भी कैदी को नहीं रखा जाता।
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लाला लाजपत राय के धर्मशाला जेल में 21 अप्रैल 1922 से 9 जनवरी 1923 तक बिताए गए दिनों की यादें ताजा करवाने के लिए अधीक्षक कार्यालय में बाकायदा ताम्र पत्र भी चस्पां है।

इसमें लाला जी के नाम के अलावा स्वतंत्रता सेनानी मोलवी हबिबुर रेहमान, एस सरदुल सिंह कवीशर, युद्धवीर, मास्टर कबूल सिंह, मियान इफ्तिखारूद दीन, बशी राम, सरला मित्र और पंचम चंद्र के नाम शामिल हैं।
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इसलिए जेल में बंद थे लाला

कहा जाता है कि ब्रिटिश हुकूमत ने बड़ा विद्रोह होने के डर से लायन ऑफ पंजाब के नाम से जाने गए लाला लाजपत राय को 22 अगस्त, 1922 को लाहौर जेल से धर्मशाला शिफ्ट किया। यहीं पर लाला लाजपत राय ने आजादी की लड़ाई का बीज बोया है।

उन दिनों हर तरफ ब्रिटिश हुकूमत का विरोध हो रहा था। ऐसे में गर्म मिजाज लाला जी के आने से धौलाधार की बर्फीली वादियां एकाएक गर्म हो गईं। लाला जी धर्मशाला जेल में 264 दिन रहे। क्रांतिकारी गतिविधियों में गर्माहट लाने वाले लाला जी से डरे गोरे उन्हें अन्य क्रांतिकारियों से दूर रखने के लिए ही लाहौर से धर्मशाला लेकर आए थे।
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जेल में कैदियों ने गाए देश भक्ति के गीत

स्वदेशी जनांदोलन के योद्धा लाला लाजपत राय का 150वां जन्मोत्सव स्वतंत्रता संग्राम के दौरान धर्मशाला जेल में बिताए गए उनके 8 महीने 19 दिनों को याद करते हुए मनाया गया।

इस अवसर पर बुधवार को जिला कारागार में लाला को अधीक्षक जेल सुशील राणा, उपाधीक्षक एमआर राणा सहित कर्मचारियों और जेल के कैदियों ने श्रद्धासुमन अर्पित कर याद किया।

बंदियों ने देशभक्ति गीतों के माध्यम से अपने अंदर छिपी संगीत की प्रतिभा का बखूबी प्रदर्शन करते हुए देश भक्ति के गीतों की प्रस्तुतियां दीं। जेल अधीक्षक सुशील राणा ने बंदियों को लाला लाजपत राय के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े पहलुओं के बारे में बताया।
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