जेल में कैदियों को सुधारने के लिए जहां योग और ध्यान कार्यक्रमों का आयोजन करवाया जाता है, वहीं धर्मशाला जेल से 24 के करीब कैदी अपने अच्छे चाल-चलन के कारण ओपन एयर जेल में काम कर रहे हैं।
हिमाचल में अकसर पुलिस को चकमा देकर कैदियों के फरार होने की खबरें सुनने को मिलती हैं, लेकिन इसके विपरीत धर्मशाला की ओपन एयर जेल भरोसे की नींव पर ही चल रही है। कुछ कैदियों ने खुद को बदल कर जेल प्रशासन का भरोसा जीता। इसके बाद उन्हें ओपन एयर जेल में काम करने की स्वतंत्रता मिली है।
विज्ञापन
कैदी रोजाना सुबह 9 बजे काम पर निकलते हैं शाम 6 बजे जेल लौट आते हैं। जेल प्रशासन और बंदियों के बीच भरोसे का यह रिश्ता बदलाव का संकेत दे रहा है। सजा काट रहे कैदियों को ओपन एयर जेल में जाने का मौका उनके चाल-चलन, व्यवहार और काटी गई सजा के आधार पर मिलता है। इस समय धर्मशाला जेल में 24 के करीब कैदी कार वाॅशिंग, बेकरी के अलावा दूसरे संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं।
जहां कुछ लोग जेल के कार वाशिंग सेक्शन में काम कर रहे हैं, तो वहीं कई कैदी जेल में ही चल रही बेकरी और शेल्यून में भी सेवाएं दे रहे हैं। कुछ कैदियों को दूसरे निजी संस्थानों में भी काम पर भेजा जा रहा है। वहां वे दिन में ड्यूटी कर शाम को वापस जेल पहुंच जाते हैं। यह उन कैदियों पर जताया गया भरोसा ही है, जिसके चलते उन्हें खुला माहौल मिल रहा है। जेल प्रबंधन की मानें तो अगर कोई कैदी इस भरोसे को तोड़ता है तो उसे दोबारा इस तरह का मौका नहीं मिलता है।
विज्ञापन
जेल में योग, ध्यान भी करवा रहे
लाला लाजपराय जिला मुक्त एवं सुधार गृह जेल में बंद कैदियों को सुधारने में जुटा है। जेल में कैदियों को सुधारने के लिए जहां योग और ध्यान कार्यक्रमों का आयोजन करवाया जाता है, वहीं धर्मशाला जेल से 24 के करीब कैदी अपने अच्छे चाल-चलन के कारण ओपन एयर जेल में काम कर रहे हैं।
लाला लाजपतराय जिला मुक्त एवं सुधार गृह धर्मशाला में 300 से अधिक कैदी सजा काट रहे हैं। 24 जेल बंदियों को उनके अच्छे चाल, चलन और उनके दिलाए भरोसे पर ओपन एयर जेल में शिफ्ट किया है। जहां पर कार्य कर भविष्य को संवारने में जुटे हुए हैं। - विकास भटनागर, डीएसपी, जेल