इसके लिए डिपो में भी राशन कार्ड के जरिये आधा आटा और आधा कनक देने का सरकार ने फैसला लिया है। मारकंडा ने कहा कि उन्होंने सरकार के सदन पटल पर यह मांग रखी है।
इसमें कहा गया है कि लाहौल-स्पीति के लोगों को जीना और मरना दोनों के लिए लोकल शराब और छां की जरूरत पड़ती है। शादी की मंगनी, मेहमानों की खातिरदारी, शादी समारोह से लेकर गोंपा में पूजा-पाठ, किसी के घर में मौत होने पर और पौथी पढ़ने के शगुन के लिए भी घर में बनी शराब की आवश्यकता
होती है। इसलिए अब इसके लिए लाइसेंस का प्रावधान रखा गया है। उन्होंने कहा कि गोवा एक ऐसा राज्य है, जहां फैनी शराब सभी घरों, रेस्तरां और अन्य दुकानों पर बिकती है। इसी के तर्ज पर लाहौल-स्पीति जिले में भी इसकी बिक्री करवाई जाएगी। इससे यहां के लोगों की आमदनी बढ़ाई जा सके।