लखविंद्र राणा बोले-उनके साथ धोखा हुआ और रोने लगे
उधर, नालागढ़ से निर्दलीय विधायक केएल ठाकुर की भाजपा में वापसी पर लखविंद्र राणा का दर्द भी सामने आ गया। भाजपा के टिकट पर 2022 में विधानसभा का चुनाव लड़ने वाले राणा मंगलवार को नालागढ़ में एक कार्यक्रम में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के सामने ही मंच पर रो पड़े। उनका कहना है कि छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित केएल ठाकुर को मंडल भाजपा से सलाह-मश्विरा किए बिना कैसे पार्टी में वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि वह अपने समर्थकों के साथ बातचीत कर अगली रणनीति बनाएंगे।
वीरेंद्र कंवर केएल भुट्टो को प्रत्याशी बनाए जाने से आहत
वहीं, कुटलैहड़ से भाजपा से चार बार विधायक रहे पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर पार्टी की ओर से केएल भुट्टो को प्रत्याशी बनाए जाने से आहत हैं। पीड़ा बयां करते हुए उनका कहना है कि फैसला सर्वे के आधार पर होता तो मलाल नहीं होता। उम्मीद है कि हाईकमान पुनर्विचार कर टिकट का फैसला सर्वे के आधार पर करेगा। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं व समर्थकों से विचार कर अगला कदम उठाएंगे। प्रत्याशी बनाए भुट्टो के मंगलवार को स्वागत कार्यक्रम से वीरेंद्र कंवर और उनके समर्थकों ने दूरी बनाए रखी। मंडल भाजपा पदाधिकारी भी मौके पर मौजूद नहीं रहे। उधर, बड़सर से लखनपाल को टिकट देने पर पूर्व भाजपा विधायक बलदेव शर्मा हाईकमान के फैसले का समर्थन करने से कन्नी काट रहे हैं। उनका कहना है कि फिलहाल लोकसभा चुनाव पर फोकस है। कार्यकर्ताओं से रायशुमारी कर उपचुनाव पर फैसला लेंगे। धर्मशाला में सुधीर शर्मा को टिकट देने पर भाजपा के पूर्व प्रत्याशी रहे राकेश चौधरी के अनुसार हाईकमान का फैसला समझ से बाहर है। कार्यकर्ताओं-समर्थकों की बैठक बुला ली है। जो उनकी भावना होगी, उसी के अनुसार फैसला लेकर आगे बढ़ेंगे।
नींव के कंकड़ थे, बाल की तरह बाहर निकाला : कपूर
प्रदेश भाजपा के कद्दावर नेता एवं कांगड़ा से सांसद किशन कपूर पहले आम चुनाव और फिर उपचुनाव के लिए टिकट के फैसले से व्यथित हैं। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि टिकट काटने का मुझे एतराज नहीं था, लेकिन मुझसे बात तो की जाती। मेरे क्षेत्र में टिकटों का फैसला लेते समय मुझ से पूछा तक नहीं। पांच बार के विधायक और भाजपा सरकारों में कैबिनेट मंत्री रह चुके किशन कपूर ने कहा कि हिमाचल में वह पार्टी की नींव के कंकड़ रहे हैं। दुख है कि उन्हें बाल की तरह बाहर निकाल दिया गया। किसी भी मसले में राय लेना तो दूर पूछना तक हाईकमान ने जरूरी नहीं समझा। कमी तो बताई जाए। आखिर मैं भी आम इंसान हूं। अनदेखी और एकतरफा फैसले से दुख होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ लगातार विचार-मंथन चल रहा है। आगे क्या करना है, जल्द ही स्पष्ट कर दिया जाएगा।