हिमाचल के कुल्लू के कोटला गांव में हुए भीषण अग्निकांड के पीड़ितों से मिलने पहुंचे आयुर्वेद मंत्री कर्ण सिंह को देवताओं के क्रोध का भी सामना करना पड़ा। बाली चौकी में देव खेल के माध्यम से देवता के गूर ने आयुर्वेद मंत्री कर्ण सिंह से दो टूक शब्दों में कहा कि अठारह करडू की सौ में देव परंपराओं के साथ हो रहे खिलवाड़ को तत्काल रोका जाए।
ढालपुर मैदान देवी देवताओं का है। लेकिन हालत ऐसी हो गई है कि यहां देवी देवताओं को स्थान तक नहीं है। उन्होंने कहा कि अभी तो मैंने अपने पर ली है, अगर सुधार नहीं हुआ तो और उग्र तांडव को तैयार रहें। वहीं मंत्री कर्ण सिंह ने आश्वासन दिया कि देव परंपराओं से किसी प्रकार छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। यही नहीं, मंत्री को देवताओं के लिए स्थानीय लोगों के सवालों का भी सामना करना पड़ा।
सृष्टि के रचनाकार है बड़ा छमाहूं
देवता बड़ा छमाहूं को सृष्टि का रचनाकार माना जाता है। ओम शब्द से प्रकट हुए हैं। छमाहूं का अर्थ है छह जमा मूंह यानी छह समूहों का एक देवता। 6 समूह में ब्रह्मा, विष्णु महेश, आदी, शक्ति, शेष नाग शामिल हैं। ये अनंत देवता सृष्टि की रचना करते हैं और इनके बिना सृष्टि अधूरी है। देव इतिहास के मुताबिक जब महा प्रलय आई थी तो उसके बाद सृष्टि की पुन: रचना के लिए देव बड़ा छमाहूं ने अवतार लिया था।
राख के ढेर में बदला सैंज घाटी का सबसे बड़ा गांव
सैंज घाटी का सबसे बड़ा गांव कोटला राख के ढेर में बदल गया है। आग ने न घर छोड़े न देवी-देवताओं के मंदिर। गांव के पांच देवी-देवताओं के मंदिरों की संपत्ति जल गई है। अकेले बड़ा छमाहूं देवता की कोठी ही एक करोड़ की थी। इसका निर्माण देवदार के 500 पेड़ों से किया गया था। इसके अलावा कोठी में रखे सोने-चांदी के आभूषण और नकदी जलकर राख हो चुकी है।
धामणी छमाहूं का मंदिर, देवता भूहणी का मंदिर, धामणी छमाहूं का भंडार, देवता बड़ा छमाहूं के करोड़ों रुपये के सोने-चांदी के आभूषण भी इस अग्निकांड में जल गए हैं। इसके अलावा प्रशासन की प्रारंभिक रिपोर्ट में पूरे गांव में 50 करोड़ से अधिक के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
देवताओं की कितनी संपति जली, नहीं पता
उपायुक्त कुल्लू राकेश कंवर ने बताया की प्रारंभिक जांच में जो आंकलन हुआ है, उसके अनुसार गांव को हुआ नुकसान ही 50 करोड़ से अधिक हो जाएगा। देवताओं की संपत्ति को कितना नुकसान हुआ है, इस बारे में अभी कुछ नहीं बताया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि मंदिरों की संपत्ति के बारे में अभी कारदारों और हरियानों से पूछा जाएगा। लेकिन अभी पूरा गांव शोक में है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से गांव में 50 टेंट लगा दिए गए हैं। खाने की पूरी व्यवस्था की गई है। प्रभावित परिवारों को प्रशासन की ओर से 30-30 हजार रुपये की फौरी राहत दी गई है।