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लंका दहन के बाद लौटे देवता, कुल्लू दशहरा उत्सव संपन्न

Thu, 25 Oct 2018 05:59 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कुल्लू
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देव महाकुंभ एवं अनूठी परंपराओं के संगम अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव सात दिन बाद लंका दहन के साथ ही संपन्न हो गया। लंका पर चढ़ाई के लिए भगवान रघुनाथ के रथ को खींचने के लिए ढालपुर मैदान में हजारों लोगों की भीड़ जुटी।

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सात दिनों तक चले इस महाकुंभ में देवी-देवताओं के साथ भगवान रघुनाथ ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर लंका पर चढ़ाई कर रावण परिवार के साथ बुराई का भी अंत किया। उत्सव संपन्न होते ही देवी-देवता भी अपने देवालयों के लिए लौट गए।

वीरवार को रघुनाथ शिविर से ढालपुर कैटल ग्राउंड तक लंका दहन के लिए माता हिडिंबा का रथ रवाना होते ही रघुनाथ की रथयात्रा शुरू हुई। परंपरा का निर्वहन करने के लिए माता हिडिंबा का रथ सबसे पहले ढालपुर के एक छोर पर पहुंचा।

इसके बाद पालकी में सवार भगवान रघुनाथ के साथ खराहल के आराध्य देवता बिजली महादेव, ज्वाणी महादेव, माता ज्वाला फोजल, भनारा के तक्षक नाग, सोयल की माता कोटली, भारका खंडासन, भोष के देवता वीरनाथ, प्रीणी के फाहली

नाग, सृष्टि नारायण, खखनाल की माता पार्वती और कार्तिक स्वामी, बराण के देवता नीलकंठ महादेव, सजला के देवता विष्णु, नग्गर की माता त्रिपुरा सुंदरी, बारी पधरू के देवता गौहरी, फोजल की ज्वाला माता आदि देवता भी रथयात्रा में शामिल हुए। 
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जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजा ढालपुर मैदान

ढालपुर मैदान के एक छोर पर लगाए गए पुलिस पहरे के आगे लोगों को नहीं जाने दिया गया। राज परिवार और माता हिडिंबा के चुनिंदा देवलुओं को ही विशेष स्थान पर जाने की अनुमति दी गई।

करीब 15 मिनट तक लंका दहन की परंपरा निभाई गई। लंका पर विजय पाने के बाद आराध्य भगवान रघुनाथ देवी-देवताओं के साथ वापस मंदिर की ओर निकले। इस दौरान ढालपुर मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।

वहीं, रघुनाथ के रथ को खींचने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। हालांकि, दशहरा उत्सव में शामिल होने के लिए इस वर्ष 264 देवी-देवता आए हैं, लेकिन लंका दहन में करीब दो दर्जन देवी देवताओं ने हिस्सा लिया। पर्यटकों ने इन खूबसूरत लम्हों को कैमरों में भी कैद किया। 
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