वीरवार को रघुनाथ शिविर से ढालपुर कैटल ग्राउंड तक लंका दहन के लिए माता हिडिंबा का रथ रवाना होते ही रघुनाथ की रथयात्रा शुरू हुई। परंपरा का निर्वहन करने के लिए माता हिडिंबा का रथ सबसे पहले ढालपुर के एक छोर पर पहुंचा।
इसके बाद पालकी में सवार भगवान रघुनाथ के साथ खराहल के आराध्य देवता बिजली महादेव, ज्वाणी महादेव, माता ज्वाला फोजल, भनारा के तक्षक नाग, सोयल की माता कोटली, भारका खंडासन, भोष के देवता वीरनाथ, प्रीणी के फाहली
नाग, सृष्टि नारायण, खखनाल की माता पार्वती और कार्तिक स्वामी, बराण के देवता नीलकंठ महादेव, सजला के देवता विष्णु, नग्गर की माता त्रिपुरा सुंदरी, बारी पधरू के देवता गौहरी, फोजल की ज्वाला माता आदि देवता भी रथयात्रा में शामिल हुए।
ढालपुर मैदान के एक छोर पर लगाए गए पुलिस पहरे के आगे लोगों को नहीं जाने दिया गया। राज परिवार और माता हिडिंबा के चुनिंदा देवलुओं को ही विशेष स्थान पर जाने की अनुमति दी गई।
करीब 15 मिनट तक लंका दहन की परंपरा निभाई गई। लंका पर विजय पाने के बाद आराध्य भगवान रघुनाथ देवी-देवताओं के साथ वापस मंदिर की ओर निकले। इस दौरान ढालपुर मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
वहीं, रघुनाथ के रथ को खींचने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। हालांकि, दशहरा उत्सव में शामिल होने के लिए इस वर्ष 264 देवी-देवता आए हैं, लेकिन लंका दहन में करीब दो दर्जन देवी देवताओं ने हिस्सा लिया। पर्यटकों ने इन खूबसूरत लम्हों को कैमरों में भी कैद किया।