रूटीन और आपातस्थिति में सैंपल भेज रहे लक्कड़ बाजार
प्रयोगशाला में बायोकेमिस्ट्री, ब्लड एनालाइजर व अन्य मशीनें फांक रहीं धूल
सैंपल लेने के बाद भेजने की प्रक्रिया में खराब होने का भी रहता है खतरा
रोजाना 1200 की ओपीडी, क्रसना लैब में तीन-चार कर्मचारी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटी (एआईएमएसएस), चमियाना में क्रसना लैब की मशीनें बंद हैं। इस कारण लैब केवल सैंपल कलेक्शन सेंटर के रूप में काम कर रही है। कर्मचारियों की ओर से सैंपल एकत्र करने के बाद जांच के लिए लक्कड़ बाजार स्थित प्रयोगशाला में भेजे जा रहे हैं। वहां सैंपल की जांच में देरी होने से मरीजों को रिपोर्ट के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इससे उपचार शुरू होने में भी देरी हो रही है।
मरीजों को हो रही परेशानी को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने क्रसना लैब के प्रबंधकों से पत्राचार किया है। प्रबंधन ने सैंपल को अस्पताल में उपलब्ध मशीनों से ही प्रोसेस करने के निर्देश दिए हैं, ताकि मरीजों को समय पर रिपोर्ट मिल सके और उनका उपचार जल्द शुरू हो सके।
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में मरीजों की जांच के लिए सरकारी और क्रसना लैब की सुविधा उपलब्ध है। सरकारी लैब में सुबह आठ से दोपहर एक बजे तक सैंपल एकत्र करने और उनकी जांच का काम किया जाता है। यहां सरकार की ओर से उपलब्ध करवाई सुविधाओं के तहत कई तरह के टेस्ट मौके पर ही किए जाते हैं और शाम तक रिपोर्ट तैयार कर दी जाती है। आपातकालीन स्थिति में रात के समय भी सैंपल लेने, जांच करने और रिपोर्ट तैयार करने की सुविधा है।
क्रसना लैब दोपहर एक बजे के बाद सैंपल एकत्र करती है। यहां तैनात कर्मचारी सैंपल लेने और उनकी एंट्री करने तक सीमित हैं। इसके बाद सैंपल जांच के लिए लक्कड़ बाजार स्थित प्रयोगशाला भेजे जाते हैं। परिवहन के दौरान सैंपल की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका भी रहती है। ऐसी स्थिति में मरीजों को दोबारा सैंपल देना पड़ सकता है।
अस्पताल में बायोकेमिस्ट्री, ब्लड एनालाइजर समेत अन्य जांच मशीनें हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। मशीनें बंद पड़ी हैं। एआईएमएसएस के प्राचार्य डॉ. बिज शर्मा ने बताया कि क्रसना लैब प्रबंधन को सैंपल अस्पताल में ही प्रोसेस करने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही स्टाफ बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
स्टाफ की कमी से परेशानी
क्रसना लैब में कर्मचारियों की कमी भी मरीजों की परेशानी बढ़ा रही है। अस्पताल की इस लैब में तीन से चार कर्मचारी ही काम संभाल रहे हैं। मरीजों की भीड़ बढ़ने पर सरकारी लैब के कर्मचारी भी सैंपल लेने में सहयोग करते हैं, ताकि मरीजों को अधिक इंतजार न करना पड़े।
अस्पताल में रोजाना करीब 1200 मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें से लगभग 800 मरीजों के रूटीन और आपातकालीन जांच के लिए टेस्ट किए जाते हैं। ऐसे में क्रसना लैब की मशीनें बंद होने और कर्मचारियों की कमी से जांच व्यवस्था प्रभावित हो रही है।