ड्रोन से प्राप्त तस्वीरों के मुताबिक कोटरोपी की पहाड़ियों में फिर से पानी जमा हो गया है। ये पहाड़ियां कभी भी दरक सकती हैं। यहां एनएच का नामोनिशान मिट गया है।
कोटरोपी की पहाड़ियों में नमक की चट्टानों पर पानी लगने से पहाड़ गल गए हैं। पहाड़ी के नीचे से उच्च मार्ग मंडी-पठानकोट है। रविवार को प्रशासन ने ड्रोन से जायजा लिया। यहां खतरा बढ़ गया है।
- फोटो : संवाद
डीसी मंडी अरिंदम चौधरी ने रविवार को भू-विशेषज्ञों के दल के साथ पधर के बधौनीधार में कोटरोपी ओर गवाली के पुंदल गांव में दरक रही पहाड़ी का जायजा लिया। इस दौरान ड्रोन से तस्वीरें भी ली गईं। अगर बारिश का क्रम जारी रहा तो एक बार फिर से बड़ी तबाही आ सकती है। ऐसे में आसपास के लोगों और स्थानीय प्रशासन को सचेत रहने के लिए कहा गया है।
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ड्रोन से प्राप्त तस्वीरों के मुताबिक कोटरोपी की पहाड़ियों में फिर से पानी जमा हो गया है। ये पहाड़ियां कभी भी दरक सकती हैं। यहां एनएच का नामोनिशान मिट गया है। 2017 में भी यहां पहाड़ दरकने से 50 लोगों की मौत हुई थी। विधायक जवाहर ठाकुर ने भी कोटरोपी पहुंच कर घटनास्थल का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि एनएचएआई को राहत कार्य में तेजी लाने के लिए वह बात करेंगे।
कोटरोपी के बाइंनाला में नौतोड़ जमीन बही
बारिश ने जगह-जगह कहर बरपाया है। कोटरोपी के बाइंनाला के ऊपर पहाड़ी दरकने से चुन्नी लाल की साढ़े तीन बीघा नौतोड़ जमीन बह गई। पॉलीहाउस भी क्षतिग्रस्त हो गया। गोशाला को भी नुकसान पहुंचा है। चुक्कू पंचायत के नागणी गांव में भूस्खलन से रूमी राम और लाल सिंह के मकान खतरे की जद में आए हैं।
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चुक्कू में नागी देवी के घर में मलबा, पानी आने से खतरा बना हुआ है। महिला के परिवार को पंचायत के सामुदायिक भवन में शिफ्ट किया गया है। लुणी गांव में गोशाला ढह गई। सत्यानी धार में भूस्खलन की चपेट में रोशन लाल की एक भैंस मर गई।