इस दौरान एनएचएआई के अधिकारियों और वरिष्ठ इंजीनियरों से कीरतपुर-नागचला फोरलेन की जानकारी के साथ पठानकोट-मंडी की वास्तुस्थिति के बारे में भी पूछा।
इस दौरान एनएचएआई के अधिकारियों ने बताया कि जिस कंपनी को कीरतपुर-नागचला फोरलेन का टेंडर दिया गया था वह आर्थिक संकट से जूझ रही थी तथा अब एनएचएआई कंपनी को अंडर टेकिंग लेटर देगी,
जिससे कंपनी को बैंक से अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए ऋण प्राप्त होगा। अधिकारियों ने अप्रैल 2019 तक कीरतपुर-नागचला फोरलेन का कार्य पूरा करने का आश्वासन दिया।
पठानकोट-मंडी फोरलेन का कार्य आरंभ हो गया है, लेकिन स्टेज-5 (घट्टा से मंडी) की लाइनमेंट और भू-अधिग्रहण का कार्य मई अंत तक पूरा कर लिया जाएगा।
फोरलेन की डीपीआर मई तक पूरी हो जाएगी तथा जून-जुलाई में टेंडर प्रक्रिया और अगस्त में निर्माण कार्य आरंभ कर दिया जाएगा। पठानकोट-मंडी फोरलेन बन जाने से मंडी-पठानकोट की 35 किलोमीटर की दूरी कम होगी।
सांसद ने एनएचएआई के अधिकारियों को निर्देश दिए कि कीरतपुर-नागचला और पठानकोट-मंडी फोरलेन के निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की देरी न की जाए।