जानकारी के अनुसार, मंगलवार पूर्वाह्न 11 बजे जब रेत से लदा ओवरलोड डंपर पुल पार कर रहा था, तो अचानक पुल टूट गया। पुल क्षतिग्रस्त होने से जोर से आवाज हुई। पुल क्षतिग्रस्त होकर सतलुज नदी के किनारे जा गिरा। वर्ष 2016 में भूस्खलन प्रभावित उरनी ढांक में नेशनल हाईवे-पांच के विकल्प के तौर पर इस पुल का निर्माण किया गया था। सतलुज नदी पर बना यह बेली ब्रिज एनएच से सतलुज पार एक वैकल्पिक सड़क को जोड़ता है, जो यहां से आगे चोलिंग पुल के पास पहुंचती है।
चोलिंग का पुल एनएच-पांच को जोड़ता है। हालांकि, बेली ब्रिज क्षतिग्रस्त होने से यातायात पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। शिमला, रामपुर से रिकांगपिओ, काजा और सांगला वैली की ओर वाहनों की बराबर आवाजाही हो रही है। हादसे के बाद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। वहीं, पुलिस और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी भी मौके का जायजा लेने पहुंचे। स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद डंपर में फंसे चालक को सुरक्षित बाहर निकाला। चालक को हल्की चोटें आई हैं। पुल टूटने से एनएचएआई को करोड़ों की क्षति पहुंची है।
सतलुज नदी पर बना 190 फीट लंबा बेली ब्रिज टूट गया है। पुल के दोनों ओर ओवरलोड वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने को लेकर चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं। रेत से लदे ओवरलोड डंपर के कारण यह हादसा पेश आया है, जिसमें करोड़ों के नुकसान का अनुमान है। - उमेश लारजू, सहायक अभियंता, एनएचएआई भावानगर