करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर पैदा होने वाले किन्नौर घाटी के सेब ने देश-प्रदेश की मंडियों में दस्तक देना शुरू कर दी है। जनजातीय जिले में सेब सीजन शुरू हो चुका है। निचार और कल्पा खंड के निचले इलाकों में इन दिनों सेब तुड़ान का कार्य शुरू हो गया है।
जिले से अभी तक तीन हजार सेब पेटियां विभिन्न मंडियों के लिए रवाना कर दी गई हैं। किन्नौर का सेब स्वाद और क्वालिटी के हिसाब से सबसे बेहतर माना जाता है। इसकी डिमांड भी काफी रहती है, लेकिन इस बार शुरुआत में ही किन्नौरी सेब के दामों में भारी गिरावट से बागवान चिंतित हैं।
जनजातीय जिले किन्नौर में अगस्त माह की शुरुआत से सेब तुड़ान शुरू हो जाता है। निचार और कल्पा में तुड़ान कार्य जोरों से चलने लगा है। मैदानी इलाकों में बाढ़ से किन्नौर जिले के सेब को भी बेहतर दाम नहीं मिल पा रहे हैं। किन्नौरी सेब की प्रति प्रति पेटी 1500 से 2200 रुपये तक बिक रही थी, लेकिन अब दाम लुढ़ककर 800 से 1500 रुपये तक पहुंच गए हैं।
निचार के बागवान देवी सिंह नेगी, हीर बहादुर नेगी, देवा ज्ञालछेन नेगी, अरविंद नेगी वीरेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि मैदानी इलाकों में लगातार बाढ़ और बारिश होने से बागवानों को सेब के अच्छे दाम नहीं मिल रहे हैं। इन दिनों किन्नौर जिले के चौरा, निगुलसरी, सौलडींग, रावा, काचे, पलींगी, पौंडा, कंगोस, सुंगरा, बारो, निचार, पानवी, किल्बा, पोवारी, तांगलिंग, पूर्वनी सहित निचले इलाकों में सेब तुड़ान हो रहा है।
बीते वर्ष हुआ था 26 लाख पेटी उत्पादन
जिला किन्नौर में बीते वर्ष 26 लाख सेब पेटियां देश की विभिन्न मंडियों में पहुंची थीं। इस बार उद्यान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 20 लाख पेटियां उत्पादन की उम्मीद है। उद्यान विभाग किन्नौर के उपनिदेशक डॉ. हेमचंद शर्मा ने बताया कि इस वर्ष सेब की फ्लावरिंग के दौरान हिमपात होने से सेब उत्पादन में गिरावट आने की आशंका है।