शिमला समर फेस्टिवल की तीसरी सांस्कृतिक संध्या में हास्य कलाकार ख्याली ने आम आदमी को पेश आने वाली उलझनों को हास्य से जोड़कर रिज मैदान में मौजूद दर्शकों को जमकर लोटपोट किया।
हरियाणवी भाषा के विशेष अंदाज में बोलते हुए ख्याली ने दर्शकों के खूब ठहाके लगवाए। ख्याली ने राजनीति के बदलते रुप और हवा का रुख देकर राजनेताओं को पाला बदलने की कला में माहिर बताया।
उन्होंने पति-पत्नी की लड़ाई और पुलिस की कार्य प्रणाली पर भी जमकर व्यंग्य कसे। अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से ख्याली ने हरियाणा के लोगों को टेढ़ा बताया और इस संदर्भ में कई हास्य किस्से भी सुनाए।
समर फेस्टिवल की तीसरी सांस्कृतिक संध्या में प्रधान महालेखाकार सतीश लुंबा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। आयोजक कमेटी ने मुख्य अतिथि को शॉल और पहाड़ी टोपी पहनाकर सम्मानित किया।
हास्य कलाकार ख्याली ने कहा कि वह हास्य में अश्लीलता के सख्त खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि हास्य कलाकार सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए हास्य में अश्लीलता को परोसते हैं। हास्य में अश्लीलता परोसने वाले न केवल हास्य को खत्म कर देते हैं। बल्कि स्वयं भी बाजार से आउट हो जाते हैं।
बचपन से था कॉमेडी का शौक
हास्य कलाकार ख्याली ने कहा कि उन्हें बचपन से कॉमेडी करने का शौक था। गरीबी में जीवन बीतने के चलते कभी सोचा नहीं था कि एक दिन देश-विदेश में नाम होगा। उन्होंने बताया कि शिमला का मौसम बड़ा खुशनुमा है। इन दिनों कसौली में फिल्म छल्ला की शूटिंग में वह व्यस्त हैं। आठ जून को दोबारा फिल्म शूटिंग शुरू होगी।
प्रस्तुति के दौरान ख्याली ने रोजमर्रा में उलझनों से भरी आम आदमी की कहानी को उम्दा ढंग से प्रस्तुत किया। ख्याली ने अमीर और गरीब के बीच बढ़ रही खाई, उनके जिंदगी जीने के ढंग और अंतर को हास्य के साथ बखूबी चित्रण किया। ख्याली ने कहा कि गरीबों की आशाएं भी बड़ी छोटी होती हैं जबकि अमीर सब सुविधाएं मिलने के बाद भी खुश नहीं होता है।