तीन दिन तक चलने वाले इस लिटफेस्ट का थीम ‘दी रिवोल्यूशन विल नॉट बी टेलीविज्ड, बी द चेंज वांट टू सी’ रखा गया है। इसमें देश-विदेश के कई लेखक, साहित्यकार, चित्रकार, अभिनेता, सैन्य अधिकारी और राजनीति से जुड़ी बड़ी हस्तियां भाग ले रही हैं। राजनीतिक अर्थशास्त्री परकला प्रभाकर के अलावा पहले दिन जयदीप मुकरजिया, आर गोपालकृष्णन और राहुल सिंह ने ‘लव ऑल’ विषय पर डिबेट की। इसके बाद इंद्राणी मुखर्जी ने ‘द सैकेंड बिकमिंग’ पर चर्चा की। अनिरुद्ध सूरी ने द फेलियर हेयर एंड नॉउ विषय पर चर्चा की। वहीं कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने द मल्टी-हाइफेनेट विषय को उजागर किया।
परकला प्रभावर बोले, भाजपा ने हिंदुत्व के मुद्दे पर 2014 का चुनाव जीता था। विकास के जो वादे किए थे, वे 2018 तक आते-आते खत्म कर दिए। भाजपा राजनीति नहीं, बल्कि व्यापार करती है। इसका अनुसरण अब देश की सभी पार्टियां भी करने लगी हैं। धर्मनिरपेक्षता का राग अलापने वाली भाजपा अब हिंदुत्व को बढ़ावा दे रही है।
प्रभाकर ने कहा कि मोदी सरकार देश के अल्पसंख्यकों के लिए खतरा है। सत्ता में आते ही मीडिया को बोलने की आजादी नहीं दी। देश के बड़े-बड़े शिक्षण संस्थानों पर टैक्स लगा दिया, जो कि हमारे देश की शिक्षा प्रणाली पर खतरा है। मोदी सरकार ने केवल लोगों को दबाने का काम किया है। भाजपा देश को केवल डराने का काम कर रही है।
डिबेटर बावेजा ने कहा कि सरकार की इस तरह आलोचना करने से डर नहीं लगता। प्रभाकर ने कहा कि मेरे साथ कुछ भी हो सकता है। जब मेरी किताब लॉन्च हुई तो भी मुझे कई फोन आए, लेकिन मैं इसकी परवाह नहीं करता। उनके घर की शांति पर पूछे सवाल को उन्होंने टाल दिया। उन्होंने कहा कि इस सवाल का जिक्र यहां नहीं होना चाहिए। यहां मैं लोगों को एंटरटेन करने नहीं आया हूं। इस तरह के सवाल शोभा नहीं देते। बार-बार टटोलने पर भी प्रभाकर ने इसका जवाब नहीं दिया।
चर्चा के बाद प्रभाकर ने कहा कि जो भी मैंने लिखा और बोला है यह सब मैंने देखा है। इससे मेरे परिवार और घर के माहौल पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मैं जो देख रहा हूं उसे बोलने और लिखने से नहीं डरता। हालांकि इससे कुछ लोगों को जरूर परेशानी होगी।