खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में लेखिका गुल पनाग ने पंजाब में 90 के दशक में हुए उठापटक पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि 1990 में डाले गए प्रस्तावों ने पंजाब में काफी हलचल मचाई थी। कई आतंकवादी जासूस बनकर पंजाब में घुस आए थे। जो काफी चिंतनीय था। उस दौरान के मुताबिक आज काफी बदलाव आया है। खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के दूसरे दिन नामी हस्तियों ने भाग लिया। माइया मैइत्रा, तुषार कपूर, ऊषा उथप राजा और मुराद ने मुख्य वक्ता की भूमिका निभाई। ऊषा उथप ने गाने में नाचने पर विवश किया। दूसरे दिन लिटफेस्ट में द टाइगर ऑफ द सुंदरबन विषय पर अभिताभ घोष और पाउल ने चर्चा की। महुआ मोइत्रा ने क्राय द बिलव्ड कंट्री, ऊषा उथप, सृष्टि झा और मालिवका ने द क्वीन ऑफ पॉप, तुषार कपूर और दिव्या दत्ता ने बैचलर डैड, पवन वर्मा और मुकरंद ने लाइफ लाइन चेंज के बारे में चर्चा की। इसी के साथ प्रणय लाल और विक्रम ग्रेवाल ने द नेचर हिस्ट्री पर चर्चा की। इसके बाद पंजाब विषय पर रमेश इंद्र सिंह और गुल पनाग ने मंथन किया, जबकि बॉलीवुड पर रजा मुराद ने अपनी बात रखी।
संगीत के बगैर कुछ नहीं: ऊषा उथप
संगीत में अपनी पहचान बना चुकीं गायिका ऊषा उथप ने कहा कि संगीत के बगैर कुछ नहीं है। जब तक भगवान चाहेंगे तब तक वह लोगों के लिए ऐेसे ही गुनगुनाती रहेंगी और लोगों के दिल में अपनी जगह बरकरार रखेगी। उन्होंने कहा कि लोग का आशीर्वाद उन पर बना हुआ है। इस दौरान उन्होंने दम मारो दम समेत तीन अन्य गाने गाए।
कजन से आज तक नहीं मांगी मदद : रजा मुराद
अभिनेता रजा मुराद, सत्य शरण, बालाजी विटाल ने बॉलीवुड में विलेन का चेहरा कितना बदलने पर मंथन किया। उन्होंने बताया कि हमारा समय कुछ था। फिल्म में मेरा पहला दिन था और मैं ऐसे ही यूजुअल वहां पहुंच गया। उन्होंने मुझसे पूछा कि आपका तिलक कहां है। उस समय विलन को तिलक लगा हुआ। उन्होंने कहा कि जीनत अमान जो मेरी कजन थी, लेकिन कजन से मैंने आज तक कोई मदद नहीं मांगी। उन्होंने कहा कि मैंने बहन के लिए एक फिल्म तक छोड़ दी थी।
लिटफेस्ट के अंतिम दिन इन मुद्दों पर होगी चर्चा
अंतिम दिन इनका होगा जिक्र : इन द लाइट एंड शेड ऑफ टाइम, अकबर ऑफ हिंदुस्तान, वर्ल्ड फॉर बर्ड्स, द मैजिक ऑफ न्यू बुक्स, द स्टार्स इन माय स्काई : माय फिल्म जर्नरी, डेयर टू चेंज, आर्मी इकोलॉजी व रेत समाधि समेत आठ सत्रों में साहित्यकार संवाद करेंगे।