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Khushwant Singh litfest: दोसांझ बोले- हिंदू राष्ट्र की मांग सही तो खालिस्तान की आवाज उठाना भी गलत नहीं

Sun, 15 Oct 2023 10:42 AM IST
अरविन्द ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन

सार

दोसांझ ने कनाडा के पीएम ट्रूडो का समर्थन करते हुए कहा कि जो बयान उन्होंने दिया था, वह खालिस्तान के समर्थन में नहीं था और न ही यह कहा कि वह खालिस्तान मांगने वालों का समर्थन करते हैं।
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कनाडा के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं पूर्व अटॉर्नी जरनल उज्जल सिंह दोसांझ। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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कनाडा के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं पूर्व अटॉर्नी जरनल उज्जल सिंह दोसांझ ने कहा कि भारत में हिंदू राष्ट्र बनाने को लेकर लोगों की आवाज उठाने पर कुछ नहीं कहा जा रहा तो खालिस्तानियों को भी आवाज उठाने का हक है। उन्होंने कहा कि यदि खालिस्तान की आवाज उठाना अपराध है तो हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग उठाना भी। खालिस्तान की आवाज उठाना तब गलत होगा, यदि वह इसके लिए हिंसा करते हैं।

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दोसांझ ने कहा कि कनाडा के राजनेताओं की सिर्फ एक गलती है कि वह भारत के खिलाफ बोलने पर खालिस्तान समर्थकों को नहीं रोकते। खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के दौरान अपने संवाद के बाद विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत को कनाडा का वीजा बंद नहीं करने चाहिए था। उन्होंने कहा कि अक्तूबर से मार्च के बीच भारतीय लोग जो कनाडा में रहते हैं, वह भारत में अपनी जमीन देखने, बच्चों की शादियां करवाने, रिश्तेदारों और दोस्तों से मिलने आते हैं। ऐसे में वीजा बंद करना गलत है।

वीजा को खोलकर भारत को कनाडा के साथ दोस्ती की पहल करनी चाहिए। दोसांझ ने कहा कि दोनों देशों की सरकारों को कॉमन सेंस यूज करनी चाहिए, क्योंकि यह मामला गंभीर है, लेकिन इतना भी नहीं कि सुलझ न सके। कनाडा एक ऐसा देश है, जहां पर ज्यादातर लोग बाहर के बसे हैं। ऐसे में यदि कोई वहां पर खालिस्तानी है भी तो उसकी पैदाइश वहां की नहीं है। साथ ही वह इस सवाल को भी टाल गए कि दोनों देशों में से किसकी गलती है।
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दोसांझ ने कनाडा के पीएम ट्रूडो का समर्थन करते हुए कहा कि जो बयान उन्होंने दिया था, वह खालिस्तान के समर्थन में नहीं था और न ही यह कहा कि वह खालिस्तान मांगने वालों का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान वाले कह रहे हैं कि नीरजा को भारत ने मारा है। इसके सबूत आम लोगों को नहीं दिखाए जा सकते।

अभी यह जांच का विषय है कि नीरजा को किसने मारा। गुरुद्वारों में बंदूकें लेकर खड़े होना गलतखालिस्तानी समर्थक अमृतपाल पर पूछे गए सवाल में कहा कि उन्हें उसकी एक बात गलत लगी कि वह आम जनता और गुरुद्वारों में बंदूकें लेकर घूमते हैं। कहा कि सिखों का किरपाण रखने का हक है न कि बंदूकें। जबकि वह गुरुद्वारे में भी बंदूकें लेकर घूमते हैं।

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कनाडा विवाद और सेना में देश की राजनीति पर गर्माया सत्र

कसौली की ठंडी वादियों में दूसरे दिन भी माहौल गर्म रहा। खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में शनिवार को कुल सात विषयों पर चर्चा हुई। सत्र की शुरुआत में मेजर जनरल इयान कार्डोजो व पत्रकार सारा जैकब ने उनकी किताब पर संवाद किया। इसमें उन्होंने अग्निवीर योजना से लेकर महिलाओं के सेना में जाने पर सवाल उठाए। साथ ही राजनीति किस तरह सेना पर हावी है, उस पर भी खुलकर कहा।

उसके बाद कनाडा के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री उज्जल सिंह दोसांझ व लेखिका किम लाली के साथ ‘द टाइज दैट डिवाइड अस’ विषय पर संवाद हुआ। इसमें उन्होंने भारत और कनाडा विवाद पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कनाडा में ज्यादातर लोग बाहर के बसे हैं। उन्होंने कहा कि जब वह 1968 में पहली बार कनाडा गए तो उनसे भी वहां पर भारतीयों की तरह बर्ताव किया जाता था। मगर अब वह वहां के नागरिक हैं और वहां पर कई बड़े पदों पर रहे चुके हैं।

1984 के दंगों पर उठाए सवाल
दोसांझ ने कहा कि 1984 के दंगों के बाद विदेशों में पंजाबियों के साथ व्यवहार ठीक नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यह बात उन्होंने इंदिरा गांधी को भी बताई। भारत में 1984 में खालिस्तानियों की तादाद अधिक थी। मगर आज 95 फीसदी सिख खालिस्तानी समर्थक नहीं हैं।

घाटे को कम करने पर लिखी किताब पर चर्चा
देश के जाने-माने कारोबारी व लेखक आर गोपालकृष्ण ने अपनी किताब व्हाई फ्लाईज, क्लब्स एंड कंपनीज गो राउंड इन सर्कल पर चर्चा की। वार्ताकार सेरेना जैकब के साथ संवाद में उन्होंने बताया कि कंपनियों को घाटे से कैसे उबारा जाए। उन्होंने कहा कि कंपनी एक व्यक्ति की नहीं होती। यह कर्मचारियों और ग्राहकों की भी होती है। ऐसे में घाटा होता है तो उनका भी ध्यान रखना पड़ता है।

इन्होंने भी की चर्चा
इस दौरान उपन्यासकार दिनेश ठाकुर और राजनीतिज्ञ प्रशांत रेड्डी ने फार्मेसी हील दे-सेल्फ विषय पर फार्मेसी को लेकर विस्तार से चर्चा की। वार्ताकार अमृता त्रिपाठी उनके साथ चर्चा में शामिल रहीं। नेशनल जियोग्राफ़िक एक्सप्लोर आरती कुमार राव ने पत्रकार बहार दत्त के साथ डॉक्यूमेंटिंग द क्लाइमेट क्राइसिस : अनडुइंग सेंचुरीज ऑफ स्लो वॉयलेंस विषय पर चर्चा की। उन्होंने वॉयलेंस को देश के लिए एक दीमक बताया। पत्रकार बरखा दत्त माय सेक्युलर लेसन्स फ्राॅम द आर्मी विषय पर चर्चा की। वहीं अंतिम सत्र में वक्ता अनिरुद्ध भट्टाचार्जी ने वार्ताकार बालाजी विट्टल के साथ संवाद किया।

कल इन विषयों पर होगी चर्चा
लिटफेस्ट के अंतिम दिन रविवार को पहले सत्र में उपन्यासकार अमृता त्रिपाठी द हैपीनेस हाइपोथिसिस पर सारा जेकोब के साथ चर्चा करेंगी। इसके बाद अभिनेता और कांग्रेस नेता राज बब्बर अपनी बेटी जूही बब्बर सोनी के साथ लाइव कैमरा एक्शन विषय पर अनूप सोनी के साथ संवाद करेंगे। अगले सत्र में अभिनेत्री मारिया गुरेती, ज्योतिषाचार्य कल्पेश रत्ना प्रभा चंद्रन के साथ संवाद करेंगे। वहीं क्रिकेटर विक्रमजीत सिंह बच्ची करकरिया के साथ चर्चा करेंगे।
 
इसके अलावा अंजुम हसन वींग मुस्लिम इन टूडे इंडिया विषय पर सारा जेकोब के साथ चर्चा करेंगी। वहीं भारतीय थियेटर निर्देशक अनुराधा कपूर, राजनेता रूपिंद्र सिंह वेयर वी विलॉग विषय पर महुआ चिन्नपा के साथ अपने विचार रखेंगे। वहीं किरणजीत संधु, राजन कश्यप न्यू वॉयस न्यू रेव्यूल्यूशन पर संवाद करेंगे। शाम 5:00 बजे लिटफेस्ट का समापन हो जाएगा।
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