स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार चिकित्सकों की समस्याओं से भली-भांति परिचित है। उनके समाधान को सदैव प्रयासरत रही है। सरकार ने चिकित्सकों को हर स्तर पर बेहतर माहौल और सुविधाएं दी हैं।
कहा कि सरकार चिकित्सकों की कार्यस्थल पर सुरक्षा को लेकर गंभीर है। उन्हें कार्यस्थल पर ऐसी पुख्ता व्यवस्था दी जाएगी, जिससे उनसे दुर्व्यवहार की कोई भी घटना न घट सके। मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन के 23 फरवरी को सामूहिक अवकाश लेने और उसके बाद पेन डाउन हड़ताल पर जाने की चेतावनी के बाद शनिवार को स्वास्थ्य मंत्री ने अपना पक्ष रखा।
कहा कि सरकार ने प्रदेश में चिकित्सकों के साथ घट रही दुर्व्यवहार की घटनाओं पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए मेडीपर्सन एक्ट में गैर जमानती प्रावधान के बारे में मामला विधि विभाग के परामर्श को भेजा है। विधि विभाग के परामर्श के बाद यह अधिनियम विधानसभा में लाया जाएगा।
मंत्री बोले, डॉक्टर नहीं उठाएंगे ऐसा कदम
कौल सिंह ने कहा कि सरकार का चिकित्सकों के साथ हमेशा सौहार्दपूर्ण संबंध रहा है। उनकी जायज मांगों को हमेशा पूरा किया है। विभिन्न अस्पतालों में चिकित्सकों पर काम का बोझ कम करने को चिकित्सकों के 550 पद और विशेषज्ञों के 60 पद भरने के साथ नर्सों की विभिन्न श्रेणियों के 600 से अधिक पद भरे हैं।
571 और पद भरे जा रहे हैं। कहा कि चिकित्सक स्वास्थ्य विभाग की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। सरकार भी उनके कल्याण के प्रति कृतसंकल्प है। चिकित्सकों की मांगों और समस्याओं का मिल बैठकर समाधान किया जाएगा। उन्होंने आशा जताई कि चिकित्सक ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे, जिससे मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना करना पडे़।
23 जनवरी से डॉक्टरों की हड़ताल, बढ़ेंगी मुश्किलें
प्रदेश में 23 जनवरी से प्रस्तावित डॉक्टरों के विरोध प्रदर्शन से लोगों की मुश्किल बढ़ सकती है। बीते साल भी अगस्त महीने में 14 दिन तक डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने से स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई थीं। सरकार ने अगर समय रहते हड़ताल को लेकर कोई फैसला नहीं लिया तो हालात खराब हो सकते हैं।
मेडिकल ऑफिसर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. जीवानंद चौहान का कहना है कि इस बार सरकार के आश्वासन पर आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। जब तक सरकार डॉक्टरों के सुरक्षा मामले में अपराधियाें के खिलाफ गैर जमानती वारंट लाने के आदेश लिखित में जारी नहीं होंगे, तब तक हड़ताल को टाला नहीं जाएगा।
उन्होंने कहा कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र में विधेयक पेश हो सकता था। उन्होंने बताया कि 23 जनवरी को डॉक्टर सामूहिक अवकाश लेंगे। 24 जनवरी से 2 फरवरी तक काले बिल्ले लगाकर विरोध करेंगे। तीन से 12 फरवरी तक सभी डॉक्टर सुबह दो घंटे की पेन डाउन स्ट्राइक करेंगे। 13 फरवरी को दोबारा एक दिन की सामूहिक छुट्टी करेंगे।
एसोसिएशन का कहना है अगर फिर भी सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो 24 फरवरी को प्रदेश के सभी डॉक्टर सामूहिक त्यागपत्र दे देंगे। उन्होंने कहा आंदोलन के दौरान आम जनता को कोई परेशानी न हो, उसके लिए आपातकालीन सेवाओं को बाधित नहीं होने दिया जाएगा।