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कैथलीघाट-ढली फोरलेन प्रोजेक्ट: भट्ठाकुफर-चलौंठी टनल निर्माण से पहले अब भवनों का होगा सर्वेक्षण

Sat, 10 Oct 2026 11:22 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

ढली-कैथलीघाट फोरलेन के तहत चमियाना-भट्ठाकुफर-चलौंठी ट्वीन टनल निर्माण से मकानों में दरारें आने और विरोध के बाद अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने भवनों का सर्वेक्षण करवाने का फैसला लिया है।
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चमियाना के समीप निर्माणाधीन फोरलेन टनल। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में ढली-कैथलीघाट फोरलेन के तहत चमियाना-भट्ठाकुफर-चलौंठी ट्वीन टनल निर्माण से मकानों में दरारें आने और विरोध के बाद अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने भवनों का सर्वेक्षण करवाने का फैसला लिया है। एनएचएआई के अनुसार टनल की जद में आने वाले करीब 500 मकानों का बिल्डिंग कंडीशन सर्वे किया जाएगा। करीब 100 मीटर क्षेत्र में बनने वाली इन टनल के ऊपर बने सभी मकानों की मौजूदा स्थिति का आकलन करने के लिए वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की जाएगी। भट्ठाकुफर से चलौंठी तक के एलाइनमेंट में आने वाले सभी करीब 500 मकान इस सर्वे में शामिल होंगे। सर्वे के बाद जिन भवनों की हालत खराब मिलेगी, उनकी एनएचएआई मरम्मत करवाएगा, ताकि टनल निर्माण कार्य शुरू होने पर भवनों को कोई खतरा न हो और भवन मालिकों को नुकसान से बचाया जा सके।

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शांति विहार और भट्ठाकुफर क्षेत्र के जिन भवन मालिकों के मकानों में दरारें आ चुकी हैं, वे निर्माण कार्य को हमेशा के लिए बंद करने और पुराने सर्वे के अनुसार फोरलेन निर्माण की मांग कर रहे हैं। इस विवाद के बाद एनएचएआई ने भवन मालिकों को पूरी तरह विश्वास में लेने और उनकी संतुष्टि के बाद ही निर्माण कार्य शुरू करने का निर्णय लिया है। शांति विहार में 10 मकानों में दरारें आने के बाद ट्वीन टनल निर्माण कार्य बंद कर दिया गया है। एनएचएआई भवन मालिकों के गुस्से को शांत करने और प्रोजेक्ट की समस्या का हल निकालने के लिए हरसंभव सहयोग कर रहा है।

 

भट्ठाकुफर से चलौंठी तक 2.712 किलोमीटर टनल का निर्माण
शिमला में भट्ठाकुफर से चलौंठी तक फोरलेन की करीब 2.712 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें से करीब 700 मीटर टनल का काम पूरा हो चुका है। इन समानांतर टनल के ऊपर भट्ठाकुफर से लेकर संजौली के शांति विहार और चलौंठी तक करीब 500 मकान बने हैं, जिनमें हजारों परिवार रहते हैं। कुछ मकानों में दरारें आने के बाद क्षेत्र के निवासियों की चिंता बढ़ गई है और वे अपनी संपत्ति बचाने के लिए विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।

भवन मालिकों की सहमति और विश्वास के साथ आगे बढ़ेगा निर्माण
संजौली के शांति विहार क्षेत्र में कुछ भवनों में आई दरारों के असल कारणों का पता लगाने के लिए आईआईटी की टीम जांच कर रही है। भट्ठाकुफर से चलौंठी तक के रुके हुए निर्माण कार्य को दोबारा शुरू करने से पहले एलाइनमेंट में आ रहे सभी भवनों का बिल्डिंग कंडीशन सर्वे करवाया जाएगा। हर मकान की वास्तविक स्थिति का आकलन कर उसका रिकॉर्ड रखने के लिए फोटोग्राफी की जाएगी। जिन भवनों में दरारें आई हैं, उनका रेस्टोरेशन किया जाएगा और कमजोर भवनों को मजबूत बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में भवन मालिकों को कोई नुकसान या परेशानी न हो और फोरलेन का निर्माण बिना रुकावट जारी रह सके। लोगों का विश्वास बनाकर और उन्हें संतुष्ट करने के बाद ही टनल का निर्माण किया जाएगा।-आनंद दहिया, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, परवाणू-शिमला फोरलेन

शांति विहार के भवन मालिक बोले, टनल निर्माण हो बंद, पुराने सर्वे पर बने फोरलेन
कैथलीघाट-ढली फोरलेन में दो समानांतर टनल के निर्माण कार्य के दौरान शांति विहार में 15 मकानों में दरारें आने के बाद फोरलेन ट्वीन टनल प्रभावित संघर्ष समिति गठित की गई है। टनल निर्माण का विरोध कर रहे भवन मालिकों के साथ पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने शुक्रवार को सामुदायिक भवन में मुलाकात की। उन्होंने भवन मालिकों की शिकायतों को सुना। इस मौके पर एडीएम प्रोटोकॉल ज्ञान सागर नेगी भी मौजूद रहे। पंचायती राज मंत्री ने भवन मालिकों की बात और शिकायतों को सुनने के बाद जल्द मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के साथ समिति के लोगों की बैठक करवाने का आश्वासन दिया। टनल निर्माण से प्रभावित हो चुके और भविष्य में टनल एलाइनमेंट में आने वाले करीब तीन सौ भवन मालिकों व समिति पदाधिकारियों ने ट्वीन टनल निर्माण का विरोध कर निर्माण बंद करवाने की मांग की। शांति विहार के पार्षद विनीत शर्मा और भट्ठाकुफर वार्ड के पार्षद नरेंद्र ठाकुर सहित पूर्व पार्षद महेंद्र चौहान, राजेंद्र चौहान और भवन मालिक विजय शर्मा, राजेंद्र चौहान, रमेश ठाकुर, अंशुल चौहान, आईडी शर्मा सहित अन्यों ने साफ शब्दों में कहा कि इस एलाइनमेंट के अनुसार टनल का निर्माण न किया जाए। पुराने सर्वे के अनुसार फोरलेन बने, जिससे लोगों की संपत्ति को नुकसान न हो।
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क्या बोले मकान मालिक
अंशुल चौहान ने कहा कि एनएचएआई की प्रारंभिक रिपोर्ट में साफ कहा गया था कि टनल निर्माण में खास एहतियात, मॉनिटरिंग को उपकरण लगाने और सुरक्षा के कदम उठाने होंगे। ऐसा कुछ नहीं किया गया। दरारें आने के बाद हमारी शिकायत के बाद एनएचएआई जागा है। उन्होंने कहा कि यंग हिमालय क्षेत्र में यह पहला प्रयोग है कि इतनी घनी आबादी के नीचे से सौ मीटर तक की टनल का निर्माण किया जा रहा है। राजेंद्र चौहान ने कहा कि इन टनल के निर्माण से क्षेत्र में एक बड़ी आपदा को न्योता देना होगा। एडीएम प्रोटोकॉल ज्ञान सागर नेगी ने कहा कि एनएचएआई से भवनों की सुरक्षा और रेस्टोरेशन करने का कार्य सरकार की ओर से पीडब्ल्यूडी को दिया जा रहा है, इसका प्रस्ताव एनएचएआई को दिया गया है। नेगी ने कहा कि एनएचएआई के पुराने सर्वे में करीब 12 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण कर छोड़ दिया गया। पुराने सर्वे में नेशनल हाईवे नहीं माना। भवन मालिक आईडी शर्मा ने कहा कि चार मंजिला भवन में दरारें आई हैं। पार्षद नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि सर्वे जहां से पहले हुआ था, फोरलेन वहीं से बने। 15 भवनों में दरारें हैं, करीब तीन सौ मकान भी खतरे में हैं। यह सब टनल निर्माण की वजह से हो रहा है। सरकार और प्रशासन भी हमारा साथ दे। फोरलेन निर्माण से जो नुकसान हुआ है, उन भवन मालिकों को कोई मुआवजा तक नहीं मिला है। सरकार इसकी प्रक्रिया तय करे। पार्षद विनीत शर्मा ने कहा कि संघर्ष समिति में शामिल सभी भवन मालिकों की मांग है कि फोरलेन टनल का निर्माण बंद हो, फोरलेन पुराने सर्वे के अनुसार बनाया जाए। जिन भवनों को फोरलेन से नुकसान हुआ है, उन मकानों के संरक्षण को उचित कदम उठाए जाएं। भवन मालिकों को उचित मुआवजा देने के लिए सरकार के स्तर पर प्रक्रिया तय की जाए। जिनका नुकसान हुआ है, वो भवन मालिक आज तक भटक रहे हैं, उन्हें न्यायालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इन्हीं मुख्य मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष भी उठाया जाएगा।
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