सेना का लाइफ लाइन बन गया था मनाली-लेह मार्ग
1999 में कारगिल युद्ध में दुश्मनों के दांत खट्टे करने में मनाली-लेह नेशनल हाईवे की अहम भूमिका रही। कारगिल युद्ध में यह मार्ग सेना की लाइफ लाइन बन गया था। इसी मार्ग से होकर भारतीय सेना के जवान कारगिल तक पहुंचे। रसद और खाद्य सामग्री भी इसी मार्ग से पहुंचाई गई। युद्ध के दौरान हर रोज भारतीय सेना के जवान इस मार्ग से होकर निकलते थे। सेना की कानवाई जब यहां से निकलती थी तो स्थानीय लोग जवानों का हौंसला बढ़ाने के लिए एकत्रित होते थे। शिक्षाविद सतीश सूद ने बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान मनाली क्षेत्र के लोग और महिलाएं सुबह करीब 6:00 बजे पलचान कर सेना के जवानों का हौसला बढ़ाते थे। गौरतलब है कि बीआरओ ने 2008 में मनाली-लेह मार्ग को डबललेन बनाने का कार्य शुरू किया था। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस मार्ग को इसलिए भी प्राथमिकता दी गई कि जम्मू-श्रीनगर-लेह की बजाय यह मार्ग दुश्मनों की नजर से कोसों दूर है। अटल टनल रोहतांग के बाद शिंकुला दर्रा पर टनल का निर्माण करने से मनाली-लेह मार्ग हर मौसम में खुला रह सकता है। बीआरओ मनाली-सरचू-लेह मार्ग के साथ-साथ मनाली-शिंकुला-पदुम-कारगिल-लेह मार्ग को भी वैकल्पिक मार्ग के रूप में तैयार करने जा रहा है।