हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने प्रदेश सरकार की अफसरशाही को आगाह किया कि वे तुगलकी फरमान लेना बंद करें। अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष सुरेंद्र मनकोटिया ने कहा कि प्रदेश सरकार की अफसरशाही ने कर्मचारियों को संपूर्ण सेवाकाल में 3 पदोन्नतियां 4-9-14 नई एसीपी में से केवल एक का ही लाभ देने के बारे में जो हाल ही में फरमान जारी किया है उसका प्रदेश महासंघ कड़ा विरोध करता है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को पदोन्नति का बेसब्री से इंतजार रहता है। इतना ही नहीं एक सैद्धांतिक निर्णय के तहत हिमाचल के कर्मचारी पंजाब पद्धति पर आधारित वेतनमान से जुड़े हैं। इसके तहत उन्हें 4-9-14 के तहत वेतन वृद्धियों का लाभ दिया गया है।
इन लाभों को छीनकर प्रदेश सरकार कर्मचारियों को क्या कर्मचारी हितैषी होने का यही संदेश देना चाहती है। महासंघ के प्रदेश प्रवक्ता एलआर गुलशन ने कहा कि प्रदेश की अफसरशाही कर्मचारी विरोधी निर्णय लेकर प्रदेश के कर्मचारी हितैषी मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को भी गुमराह करने का प्रयास कर रही है।
परिवहन निगम के एक आला अधिकारी की सेवानिवृत्त पेंशनभोगी कर्मचारियों के लिए तुगलकी फरमान जारी किया गया है जिसके तहत पेंशन भोगी कर्मचारियों को अपने व अपने परिवार के सदस्यों के बीमार होने पर करवाए जा रहे इलाज की दवा के रैपर को भी अपने आहरण एवं वितरण अधिकारी को दिखाना होगा जोकि सरासर गलत है।
उन्होंने कहा कि दवाई खाने के उपरांत उसके रैपर को महीनों तक सुरक्षित रखना कहां तक तर्कसंगत है। महासंघ ने इस तरह के तुगलकी फरमान शीघ्र रद्द करने तथा कर्मचारियों को वर्तमान स्थिति के अनुसार स्वास्थ्य चिकित्सा बिलों का शीघ्र भुगतान करने की मांग की है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से स्वतंत्रता दिवस पर प्रदेश के कर्मचारियों को जनवरी 2014 से 10 प्रतिशत महंगाई भत्ते की अतिरिक्त किस्त जारी करने का भी आग्रह किया है। इस मौके पर प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष एसआर आजाद, महासचिव गोपाल शर्मा, मुख्य प्रवक्ता हरीश गुलेरिया, प्रदेश प्रवक्ता एलआर गुलशन, उपाध्यक्ष दलीप शरोट, प्रदेश संयुक्त सचिव होशियार सिंह जंबाल, रेखा मेहता, क्षेत्रीय सचिव राम सिंह वर्मा भी मौजूद थे।