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डिपो में मिलेगी आपको यहां की जैविक चाय

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हिमाचल की जनता अब पालमपुर की चाय का मजा ले सकेगी। चौधरी सरवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय के बागानों में तैयार चाय को खाद्य आपूर्ति विभाग के राशन डिपो में उपलब्ध करवाने की तैयारी चल रही है। कृषि विवि अब तक सिर्फ अपने परिसर और पालमपुर में स्थापित डिपो के माध्यम से ही चाय को बेचता रहा है।
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विवि ने अब अपने बागानों में तैयार चाय सरकारी डिपो में उपलब्ध करवाने की योजना बनाई है। विवि ने अपने उत्पादों की बिक्री और उसकी ब्रांडिंग कर बेचने को तैयार रोड मैप में इसे प्रमुखता से रखा है। हिम पालम चाय के ब्रांड से इसे बाजार में उतारने की तैयारी है। कृषि विवि के कुलपति डा. केके कटोच ने शिमला में बताया कि यूनिवर्सिटी चाय का उत्पादन कर रही है।

केमिकल स्प्रे का नहीं होगा इस्तेमाल

इसे तैयार करने में किसी तरह के केमिकल स्प्रे या कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं किया है। चाय बागानों से लाई पत्तियों से तैयार इस चाय का जायका हर हिमाचली ले, इसके लिए योजना पर कार्य किया जा रहा है। सेहत के लिहाज से यह चाय पूरी तरह सुरक्षित है। उनका कहना है कि फिलहाल यूनिवर्सिटी 200 ग्राम की पैकिंग में इसे उपलब्ध करवा रही है।

इसे डिमांड के मुताबिक अलग-अलग पैकिंग में उपलब्ध करवाया जा सकता है। उन्होंने माना कि कीमत में चाय अन्य मार्केट में बिकने वाली चाय से कुछ महंगी हो सकती है, मगर गुणों और सेहत की लिहाज से सुरक्षित इसका इस्तेमाल करना सस्ता होगा।
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50,000 किलो तक उत्पादन कर सकता है विवि

पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय के 45 हेक्टेयर में अपने चाय बागान हैं। वर्तमान में कम डिमांड को देखते हुए विवि अपने प्लांट से 20 से 25000 किलो चाय उत्पादन कर रहा है। प्लांट की क्षमता 50 हजार किलोग्राम तक है। विश्वविद्यालय के पास बागान एरिया बढ़ाने को जमीन भी है।

चाय उत्पादन से विवि की आय में भी कई गुणा बढ़ोतरी हो सकती है। विवि की 250 ग्राम चाय की पैकिंग वर्तमान में 70 से 100 रुपये में बेची जा रही है। चाय विशेषज्ञ डा. प्रमोद वर्मा का कहना है कि चाय की डिमांड को पूरा करने में विवि सक्षम है।
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