स्कूली बच्चों के लिए प्रयोग किए जाने वाले प्रत्येक वाहन चालक को पांच वर्ष का अनुभव जरूरी
चालक ने पहले वाहन नियमों का उल्लंघन न किया हो
चालक ने पहले कोई एक्सीडेंट न किया हो
निजी स्कूलों की ओर से बसों, टैक्सियों और आवागमन के अन्य साधनों को नियमानुसार इस्तेमाल करना होगा
वाहनों के लिए उपयुक्त परमिट होने चाहिए
लोगों को जागरूक करने के लिए अधिकारी जागरूकता अभियान चलाएंगे
यह व्यवस्था करनी होगी
सीबीएसई, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तमाम निर्देश और सुप्रीम कोर्ट के आदेश सख्ती से लागू करने होंगे
स्कूल प्रबंधन को सभी नई बसें रखनी होंगी
बसें निर्धारित मानदंडों के अनुरूप होनी चाहिए
निजी स्कूलों में संचालित सभी बसों में पीला रंग होना चाहिए
स्कूल में लगाई गई एचआरटीसी की बसों में आगे-पीछे बड़े अक्षरों में स्कूल बस लिखना होगा
एसडीएम, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी करेंगे जांच
वाहनों के निरीक्षण के लिए प्रदेश भर में आगामी 10 दिन में व्यापक अभियान चलाया जाएगा। इन स्कूल बसों और अन्य शिक्षण संस्थानों की बसों एवं अन्य वाहनों का निरीक्षण क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, उपमंडलाधिकारी नागरिक और पुलिस अधिकारी की ओर से किया जाएगा, जिसे हर तीन माह के अंतराल पर दोहराया जाएगा। इस तरह के वाहनों की पासिंग के नियमों को और अधिक सख्त बनाने पर भी विचार किया जाएगा।