दरअसल, सूबे की कंडा जेल से एक कैदी को पिछले दिनों सजा पूरी होने पर रिहा कर दिया गया। रिहा होने से पहले वह जेल विभाग की ही टेलरिंग शॉप में बतौर टेलर काम कर रहा था। शर्ट, सदरी से लेकर अन्य कपड़ों की सिलाई से होने वाली कमाई से उसकी औसतन पांच हजार रुपये प्रतिमाह बचत हो रही थी।
कैदी ने आवेदन में कहा है कि जेल में रहकर वह आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता महसूस कर रहा था। घर जाने पर उसे किसी ने नहीं स्वीकारा। ऐसे में वह जेल में रहकर टेलर की शॉप पर काम करना चाहता है। उसे स्वेच्छा से वहीं रहने दिया जाए।
इस अनोखे आवेदन पर जेल महानिदेशक सोमेश गोयल ने बताया कि कैदी ने जेल में लौटने की इच्छा व्यक्त कर परिवार वालों के तिरस्कार और समाज में हीन भावना को बड़ी वजह बताया है। वह खुद को एडजस्ट नहीं कर पा रहा है। रिहाई के दस दिन बाद ही उसने जेल में आने की अनुमति का आवेदन किया है।
सोमेश गोयल का कहना है कि नियमों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि कैदियों को रिहाई के बाद भी जेल में रखा जा सके, लेकिन विभाग अब विचार कर रहा है कि क्या ऐसे कैदियों को रिहाई के बाद भी आवेदन पर एडजस्ट किया जा सकता है।