जनपद के अधिष्ठाता बड़ादेव कमरूनाग के सरानाहुली मेले में देवता को हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद श्रद्धालुओं ने बेखौफ बकरे चढ़ाए। हालांकि मेले में पुलिस की सख्ती के चलते किसी भी प्रकार की पशु बलि को अंजाम नहीं दिया गया। कमरूनाग मंदिर के समीप तोष के एक बड़े पेड़ पर लगे सीसीटीवी कैमरे की नजर मेले में होने वाली हर गतिविधि पर रही। चप्पे-चप्पे पर पुलिस कर्मियों ने मोरचा संभाला हुआ था।
जिससे श्रद्धालु देवता को बकरे चढ़ाकर और दर्शन करने के बाद वापस घर लौट गए। मंदिर कमेटी ने देवता को सरानाहुली मेले में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए बकरों को अपने कब्जे में लिए तथा आगामी मंगलवार को इनकी नीलामी की जाएगी। आषाढ़ संक्रांति के दिन कमरूनाग मंदिर में सरानाहुली मेले के दौरान करीब एक लाख श्रद्धालुओं ने देवता के दर्शन किए। ऐसा पहली बार देखने को मिला जब देवता के सरानाहुली मेले में पशु बलि नहीं दी गई। बल्कि देवता को बकरे चढ़ाकर इन्हें खुले में छोड़ दिया गया।
मेले में बच्चों के मुंडन संस्कार और भक्तों की जातरें नारियल बलि से चढ़ाई गई। पुलिस ने भी मेले की वीडियोग्राफी की और मंदिर कमेटी ने सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से सरानाहुली मेले को कैद किया। इससे पूर्व सरानाहुली मेले में हर वर्ष करीब एक हजार से अधिक बकरों की बलि दी जाती थी।
कमरूनाग देवता के कटवाल रणजीत सिंह ने बताया कि देवता का मेला शांतिपूर्वक संपन्न हुआ है। एसएचओ गोहर एवं सरानाहुली मेला अधिकारी लाल सिंह ने बताया कि मेले में पशु बलि पर पूर्ण रोक लगाई गई।