कमला नेहरू अस्पताल में बच्चा बदलने के मामले में नया मोड़ आ गया है। शिमला दंपति ने सामने आकर कहा कि इस पूरे मामले में सच्चाई सामने आनी चाहिए। जिसका भी बच्चा बदला गया है वह उसे मिलना चाहिए और जिनकी लापरवाही की वजह से यह गंभीर मामला हुआ है उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में उनकी गलती का खामियाजा अभिभावकों को न भुगतना पड़े। मंडी दंपति का आरोप था कि उनका बेटा शिमला दंपति के पास है।
उनकी शिकायत पर शिमला पुलिस ने यहां रह रहे दंपति से बात की थी। पर शिमला दंपति का कहना था कि वह बेटा उन्हीं का है। उन्होंने डीएनए सैंपल दे दिया है। जल्द ये साफ हो जाएगा कि बेटा उन्हीं का है या नहीं। शिमला दंपति इस बात पर आहत है कि उन पर इस तरह का आरोप लग रहा है। दंपति ने मंगलवार को अमर उजाला कार्यालय पहुंच कर अपना पक्ष रखा।
उनका तर्क है कि मंडी की वह महिला इस बात को लेकर इतनी आश्वस्त कैसे हो सकती है कि उसे बेटा ही हुआ है। वह उस नर्से का नाम सार्वजनिक करे जिसने उसे बेटा होने की बात कही। अस्पताल में 26 मई रात ग्यारह बजे से 27 मई दोपहर तीन बजे तक आखिर वह महिला बेटा होने के बाद बेटी देखकर क्यों चुप रही?
38 दिन तक चुप रहने के बाद एकाएक बेटा होने का दावा कैसे करने लगी? उस महिला के साथ भी उनकी पूरी सहानुभूति है उसे उसका बच्चा मिलना चाहिए। दंपति ने कहा कि परिवार में दो बेटे पहले से हैं। आठ साल बाद उन्हें एक बच्ची की चाह थी लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो पाई।
उस दिन डिलवरी के बाद वहां मौजूद अस्पताल स्टाफ ने यह कहकर उनकी गोद में बच्चा दिया कि आपके बेटा हुआ है। ऐसे में उनकी बेटी होने की चाह टूट गई। डिलीवरी रूम से वार्ड में शिफ्ट होने के बाद उस महिला ने उन्हें ऑफर देते हुए कहा अगर आपको बेटा नहीं चाहिए तो वह उनकी बेटी से एक्सचेंज कर ले।
जब तक अस्पताल से छुट्टी नहीं हुई तब तक वह महिला उनसे यही बात करती रही। इस पर उस महिला को मौके पर ही साफ कर दिया गया था हम आपको अपना बच्चा क्यों दें? इसके बाद वह बेटे को लेकर घर आ गए। इसके 38 दिन बाद अब उस महिला ने
बच्चा बदलने की बात की है जब वह इस बात पर श्योर थी कि उसके बेटा ही हुआ है तो इतने दिन तक चुप क्यों रही और उन्हें बच्चा एक्सचेंज करने का ऑफर क्यों दिया? इस अति संवेदनशील मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। इसमें जो भी दोषी हो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।