ज्योति हत्याकांड के आरोप में न्यायिक हिरासत में चल रहे दून के विधायक राम कुमार चौधरी हिमाचल प्रदेश की 12वीं विधानसभा में एक भी दिन सदन की कार्यवाही में नहीं पहुंचे हैं।
प्रदेश की कांग्रेस सरकार चौधरी को लगातार छुट्टी मंजूर कर रही है। इसलिए भाजपा के विरोध के बावजूद चौधरी का विधायक पद गैरहाजिर रहने के बावजूद बचा रहेगा।
हिमाचल प्रदेश की 12वीं विधानसभा की पहली बैठक 8 जनवरी, 2014 को हुई थी। इस पहले सत्र में राम कुमार चौधरी को छोड़ अन्य विधायकों ने पद की शपथ ली। चौधरी को बाद में अदालत से शपथ लेने की अनुमति मिली थी।
मेहरबानी पर विपक्ष ने जताया ऐतराज
बारहवीं विधानसभा के अब तक पांच सत्र हो चुके हैं और अब छठा सत्र 6 अगस्त से शुरू हुआ है। इस सत्र में 16 बैठकें होंगी और 29 अगस्त को समाप्त होगा। चौधरी न्यायिक हिरासत के कारण जेल में बंद हैं।
उन्होंने इस सत्र की पूरी अवधि के लिए छुट्टी मांगी, जिसे 6 अगस्त को भाजपा के वाकआउट के बाद सदन में रखा गया। सदन में कांग्रेस विधायक उपस्थित रहे और उन्होंने चौधरी को पूरे दिन की छुट्टी दे दी।
विपक्ष के नेता प्रेम कुमार धूमल समेत भाजपा विधायकों ने वीरवार को स्पीकर बृज बिहारी लाल बुटेल के चैंबर में पहुंचकर चौधरी को छुट्टी देने पर ऐतराज जताया।
पिछली गैरहाजिरी भी छुट्टी में तबदील की
विधायक राम कुमार चौधरी बिना बताए 42 बैठकों में गैरहाजिर रहे, मगर विधानसभा ने उनकी छुट्टी मंजूर कर दी। अब 16 दिन के लिए फिर छुट्टी दे दी। आगामी 29 अगस्त तक 12वीं विधानसभा की कुल 58 बैठकें हो जाएंगी।
विधानसभा जब छुट्टी मंजूर कर देती है तो विधायक को गैरहाजिर नहीं माना जाता। भाजपा ने ऐतराज जताया है कि जेल में बंद चौधरी को छुट्टी क्यों दी जा रही है।
ये है प्रावधान
अगर कोई सांसद या विधायक सदन की बैठकों से 60 दिन के
लिए गैरहाजिर रहता है तो उसकी सदस्यता स्वयं समाप्त हो जाती है। इसके लिए
स्पीकर लिखित आदेश जारी करते हैं और सीट खाली घोषित कर देते हैं।
पढ़िए, विधानसभा अध्यक्ष क्या कहते हैं?
प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल का कहना है कि यह ठीक है कि राम कुमार चौधरी के छुट्टी के आवेदन को विधानसभा मंजूर कर रही है। विधानसभा ने छुट्टी मंजूर कर दी तो विधायक को गैरहाजिर नहीं माना जाता। एक विधायक एक आवेदन में एक बार 60 दिन का अधिकतम अवकाश ले सकता है।
यानी अगर विधानसभा का सत्र 60 दिन से ज्यादा का हो तो विधायक को सिर्फ 60 दिन की छुट्टी मिल सकती है। शेष दिन गैरहाजिर माने जाएंगे।
मगर विधानसभा की पूरी पांच साल की अवधि में विधायक के जेल में रहने के बावजूद विधानसभा से छुट्टी मंजूर होने के बाद किसी भी अवधि तक गैरहाजिर रह सकता है और उसकी सदस्यता बरकरार रह सकती है।