इंदु मल्होत्रा को वर्ष 2007 में वरिष्ठ वकील का दर्जा मिला था। वह बिना हाईकोर्ट की जज बने सीधे सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त होने वाली पहली महिला वकील होंगी। आजादी के बाद सर्वोच्च अदालत में वह सातवीं महिला जज होंगी। मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस आर भानुमति इकलौती महिला जज हैं।
जस्टिस एम फातिमा बीवी 1989 में सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने वाली पहली महिला जज थीं। इसके बाद जस्टिस सुजाता वी मनोहर, जस्टिस रूमा पाल, जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा और जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई जज रह चुकी हैं।
इंदु को आर्बिट्रेशन का विशेषज्ञ माना जाता है। गत वर्ष इंस्टीट्यूशनल आर्बिट्रेशन को लेकर केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई उच्च स्तरीय कमेटी में भी थीं। इस कमेटी ने कानून मंत्रालय को अपनी सिफारिशें भेजी थीं।
राष्ट्रपति शासन को दरकिनार कर दिया था जस्टिस जोसेफ ने
वर्ष 2016 में उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस केएम जोसेफ ने राज्य में लगे राष्ट्रपति शासन को दरकिनार कर दिया था। इसके बाद हरीश रावत सरकार दोबारा सत्ता में आई थी।
इस आदेश के एक महीने बाद ही सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने जस्टिस जोसेफ को आंध्र प्रदेश व तेलंगाना के संयुक्त हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने की सिफारिश की थी लेकिन सरकार से इसे हरी झंडी नहीं मिली।
वर्ष 2004 में जोसेफ केरल हाईकोर्ट में स्थायी जज नियुक्त हुए थे। बाद में उनका तबादला उत्तराखंड हाईकोर्ट हो गया था। वर्ष 2014 में वह यहां मुख्य न्यायाधीश बने थे। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में 25 जज हैं जबकि छह जज के पद रिक्त हैं।