हिमाचल में विधानसभा चुनाव से पहले सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जा मिल जाएगा। इसके लिए औपचारिकताएं शीघ्र पूरी की जाएंगी। हरिपुरधार में माता भंगायनी के सम्मान में आयोजित मेले के समापन पर मुख्य अतिथि केंद्रीय जनजातीय कार्यमंत्री जुएल ओराम ने यह एलान किया।
उन्होंने कहा कि गिरिपार को जनजातीय घोषित करने की आवश्यकता है। गिरिपार को जनजातीय दर्जे की मांग लंबे अरसे से उठ रही है। हाटी समाज के संघर्ष के साथ ‘अमर उजाला’ ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता उठाया है। यह मुहिम अब रंग लाने लगी है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की संस्तुति के बाद केंद्र इस प्रक्रिया को तेजी से कर रहा है। आरजीआई के बाद यह मामला विभिन्न प्रक्रिया से गुजरते हुए केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल के पास जाएगा। इसके बाद लोकसभा और राज्यसभा में बिल लाया जाएगा। फिर फाइल मंजूरी को राष्ट्रपति के पास जाएगी।
कहा कि हिमाचल में विधानसभा चुनाव से पहले गिरिपार को जनजातीय दर्जा दिलाया जाएगा। यह मामला लंबे अरसे से लंबित है। गिरिपार को उस समय दर्जा मिलना चाहिए था, जब हिमाचल के गद्दी और गुज्जर समुदाय को जनजातीय का दर्जा मिला था।
कहा कि भाजपा ने ही जनजातीय मंत्रालय की नींव रखी है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में बने इस मंत्रालय के लिए महज 840 करोड़ का बजट था। अब यह बजट बढ़ाकर 5600 करोड़ किया है। इससे पहले सांसद वीरेंद्र कश्यप ने गिरिपार को जनजातीय घोषित करने की मांग प्रमुखता से उठाई।
हाटी समिति के चंद्रमोहन ठाकुर ने भी मांग रखी। इस दौरान विधायक बलदेव तोमर, सुरेश कश्यप, चौपाल के विधायक बलवीर, पूर्व विधायक हिरदा राम, बलवीर मेला कमेटी के प्रधान संतराम, महामंत्री सही राम चौहान समेत हाटी समाज से जुड़े कई लोग उपस्थित थे।