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नड्डा बोले, मोदी ने पूरा किया अटल का सपना, नोटबंदी फायदेमंद

Tue, 27 Dec 2016 10:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बद्दी (सोलन)
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि 1947 से लेकर अब तक भारत और भारतीय का इतिहास संघर्ष पूर्ण रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तुलना पीएम नरेंद्र मोदी से करते हुए नड्डा ने कहा कि दुनिया को समदृष्टि से देखना जरूरी है।
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न चाइना से डरो, न अमरीका के आगे झुको और न ही राशिया को महसूस होने दो हम तुम्हारे ही दोस्त हैं। इस कथन को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने साकार किया। बाद में नरेंद्र मोदी ने इस बात को सार्थक किया। सबका साथ, सबका विकास नारा नहीं, यह एक कार्यक्रम है।

केंद्रीय मंत्री बद्दी में भाजपा एसटी मोर्चा के राज्य स्तरीय दीनदयाल उपाध्याय महाप्रशिक्षण वर्ग के शुभारंभ पर बोल रहे थे। कहा कि नोटबंदी का फैसला बहुत बड़ा है। सरकार करोड़ों विकास योजनाओं देने लगी है, यह नोटबंदी का असर है।
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देश की जनता इस फैसले के साथ है। नोटबंदी के सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। कहा कि पहले मनरेगा का सारा पैसा कैश में लोगों के पास जाता था। इसमें बिचौलियों की भी हिस्सेदारी होती थी। खातों में पैसा आने से अब कमीशन का खेल बंद हुआ है

 वर्ष 1971 में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने बैंक को राष्ट्रीयकृत किया। 1971 से 2014 तक बैंक खाता धारकों की संख्या 3.25 करोड़ थी। देश में 125 करोड़ की आबादी में सिर्फ सवा तीन करोड़ खाते। पिछले दो वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच ने बैंक खातों को 25 करोड़ तक पहुंचाया है।
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नड्डा ने कसा तंज, सरकार का कटोरा उल्टा

नड्डा ने वीरभद्र सरकार पर तंज कसा कि केंद्र से तो खूब धन बरस रहा है, लेकिन प्रदेश सरकार का कटोरा ही उल्टा है। प्रदेश को 61 नेशनल हाइवे मिले हैं। सीएम कहते हैं पैसा नहीं आता। प्रदेश में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। स्वास्थ्य सुविधाएं सुधारी जा रही हैं।

शिमला को 150 करोड़ का सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल स्वीकृत किया है, लेकिन अभी तक जगह नहीं मिली। चंबा को मेडिकल कॉलेज दिया, जगह नहीं मिली। मंडी को 45 करोड़ रुपये दिए, पर डीपीआर नहीं बनी। 120 करोड़ शिमला स्टेट कैंसर अस्पताल को दिए, डीपीआर नहीं बनी।

प्रदेश में पीलिया से लोग मरे, केंद्र से डिसिज कंट्रोल के सेंटर को 15 करोड़ दिए, लेकिन सरकार जमीन उपलब्ध नहीं करवा पाई। मेंटल हेल्थ के लिए टांडा को पैसा दिया, वहां भी डीपीआर नहीं बनी। करोड़ों के प्रोजेक्ट पाइप लाइन में हैं, मगर सरकार गंभीर नहीं है।
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