एचपीयू के अंतर विषय अध्ययन विभाग के वेबिनार में वक्ताओं ने दी कॅरिअर चुनने की सलाह
हर कंपनी सीएसआर रखना अब जरूरी : सिंह
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। एमबीए के विद्यार्थियों को भविष्य में कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिल्टी (सीएसआर) क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। केंद्र सरकार ने अब हर कंपनी को अपने मुनाफे से दो फीसदी सामाजिक गतिविधियों पर खर्च करना जरूरी कर दिया है। इससे आने वाले दिनों में कंपनियों में इस क्षेत्र में नौकरियां बढ़ने की संभावनाएं हैं।
यह जानकारी हिमाचल प्रदेश विवि के अंतर विषय अध्ययन विभाग के कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिल्टी (सीएसआर) क्षेत्र में कॅरिअर की संभावनाएं विषय पर आयोजित वेबिनार में वक्ताओं ने दी। स्टील स्ट्रिप लिमिटेड के सीएसआर प्रमुख प्रदीप सिंह ने वेबिनार में बतौर स्रोत व्यक्ति भाग लिया। उन्होंने छात्र-छात्राओं को बताया कि साल 2012 से अब तक सीएसआर कानून में काफी बदलाव हुए हैं। इसमें लिमिटेड कंपनियों को अपने मुनाफे से दो फीसदी सामाजिक गतिविधियों और कार्यों पर खर्च करना होता है। पहले यह स्वैच्छिक होता था, अब कंपनी अधिनियम- 2013 के तहत अनिवार्य हो गया है। इस कारण हर कंपनी सीएसआर फाउंडेशन बना रही हैं। इसमें एमबीए ग्रामीण विकास के छात्र कॅरिअर चुन सकते हैं। एमबीए आरडी में सीएसआर को पाठ्यक्रम में पढ़ाया जा रहा है। प्रदीप सिंह ने बताया कि सीएसआर कानून के अनुसार कंपनियां शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और अन्य सामाजिक कार्य करती हैं। छात्रों को चाहिए कि इन गतिविधियों पर आधारित अपनी क्षमता और कौशल में वृद्धि करें। हिमाचल में भी सीएसआर में कॅरिअर बनाने के बहुत अवसर हैं।
हिमाचल दवा कंपनियों का दूसरा बड़ा हब
दवा कंपनियों में हिमाचल एशिया का दूसरा बढ़ा हब है। यहां जल विद्युत परियोजनाओं, सीमेंट कंपनियों में करोड़ों के सीएसआर के तहत दायित्व पूरे किए जाते हैं। इनमें रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। बताया कि उन्होंने हिमाचल प्रदेश विवि से मास कम्यूनिकेशन, समाज शास्त्र और पीजीडीपीएम करने के बाद 2010 में एनजीओ से अपना सफर शुरू किया। इसके बाद हाइड्रो, टेक्सटाइल और अब आउटोमोबाइल में सीएसआर के तहत विभिन्न पदों पर काम किया। वेबीनार का संचालन विभाग के शिक्षक डॉ. बलदेव सिंह नेगी किया।