शिमला में पीलिया थमने का नाम नहीं ले रहा है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के ठेकेदार अशोक डोगर को भी पीलिया की पुष्टि हो गई है। मंगलवार को शहर के अस्पतालों में 21 नए पॉजिटिव मामले सामने आए। पीलिया ने कई बड़े अधिकारियों को भी जकड़ लिया है।
पीलिया से पीड़ित हेल्थ रेगुलेटरी कमीशन के निदेशक रामेश्वर शर्मा, अतिरिक्त सचिव सामान्य प्रशासन अश्विनी शर्मा और रिटायर्ड आईएएस डीएम नैंटा आईजीएमसी के स्पेशल वार्ड में दाखिल करवाए गए हैं।
स्टेट सर्विलेंस ऑफिसर डा. राकेश रोशन भारद्वाज ने बताया कि सरकारी विभागों के आंकड़ों के अनुसार पीलिया के कुल 1225 केस अभी तक सामने आए है। डा. भारद्वाज ने बताया कि एनआईवी पुणे गई सैंपलों की रिपोर्ट तीन या चार हफ्तों में आ जाएंगी।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट चलाने से ठेकेदार का इंकार
शहर के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का संचालन कर रहे ठेकेदार ने आईपीएच को प्लांट सरेंडर कर दिए हैं। ठेकेदार के पिता ने बेटे की ओर से विभाग को पत्र लिखकर प्लांटों को टेकओवर करने का आग्रह किया है।
विभाग को लिखे पत्र में प्लांटों की खस्ताहालत के लिए आईपीएच के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया गया है। पत्र में कहा गया है कि न्यायालय की ओर से जुलाई 2009 में दिए गए आदेशों का विभाग ने पालन नहीं किया।
प्लांट में खराब मशीनरी की न तो रिपयेर की गई और न ही इन्हें बदला गया। ठेकेदार अक्षय डोगर ने जब विभाग से मल्याणा ट्रीटमेंट प्लांट का टेंडर कैंसल करने का आग्रह किया तो इसे भी अनदेखा कर दिया गया। ठेकेदार ने विभाग से पिछले करीब आठ महीनों से लंबित बिलों के भुगतान का भी आग्रह किया है।
पीलिया मामले में अब पंप ऑपरेटरों पर दागे सवाल
शहर में फैले पीलिया मामले की जांच कर रही पुलिस की स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम ने मंगलवार को अश्वनी खड्ड पेयजल योजना में कार्यरत पंप आपरेटरों को बुलाकर उनसे पूछताछ की। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में दोपहर बाद बुलाए गए ऑपरेटरों से तीन घंटे से अधिक समय तक अधिकारियों ने सवाल पूछे।
इसकी पुष्टि करते हुए एसपी डीडब्ल्यू नेगी ने कहा कि जांच टीम ने पीलिया फैलने के कारणों के लिए जिम्मेदार मानी जा रही पेयजल योजना की दूषित पानी की सप्लाई के कारणों को जानने के लिए कर्मियों से सवाल किए। उन्होंने कहा कि पुलिस में दर्ज मामले में आरोपी बनाए जाने के बाद गिरफ्तार किए एसडीओ और ठेकेदार को मंगलवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
जबकि आईपीएच के एक्सईएन को सोमवार को ही न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। मामले की जांच कर रहे एएसपी संदीप धवल ने माना कि पेयजल योजना के पंप आपरेटर ही पानी को लिफ्ट कर शहर के भंडारण टैंक तक भेजते हैं।
इसमें खड्ड से उठाए गए पानी के सैंपल भरने और इसकी जांच करने की जिम्मेदारी किसकी होती है? प्रक्रिया क्या रहती थी? नवंबर और दिसंबर में लिए सैंपल में कोई फेल हुए या नहीं, ऐसे ही सवाल आपरेटरों से पुलिस टीम ने किए।