सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की खामियों
को लेकर सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को बार बार लिखित
में सूचित किया गया बावजूद इसके विभाग के अधिकारियों ने कुछ नहीं किया।
प्लांट में सुधार के लिए विभाग से आग्रह किया जाता रहा लेकिन गौर नहीं किया
गया। सोमवार को सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के ठेकेदार अक्षय डोगर के भाई अजय
डोगर ने ‘अमर उजाला’ कार्यालय में आ कर अपना पक्ष रखा।
उन्होंने
बताया कि विभाग को प्लांट में खराब पड़ी मशीनरी की मरम्मत के लिए पत्र लिखे
गए थे। विभाग के अधिकारियों ने जब जब प्लांट का निरीक्षण किया उन्हें
प्लांट की खामियों के बारे में अवगत करवाया गया। बावजूद इसके अफसरों ने कुछ
नहीं किया। विभाग के अधिकारियों को पत्र लिख कर बताया गया था कि प्लांट
में पड़े स्लज को ठिकाने लगाने के लिए उपयुक्त बंदोबस्त किए जाए।
यदि
व्यवस्था नहीं सुधारी जाती और सैंपल फेल होते हैं तो उसके लिए ठेकेदार
जिम्मेवार नहीं होगा। इतनी ही नहीं अक्षय डोगर ने आईपीएच विभाग को प्लांट
की कमियां दूर न होने की स्थिति में कांट्रेक्ट कैंसल करने के लिए भी लिखा।
विभाग के आला अधिकार के साथ बैठक में भी प्लांट की खामियां गिनाई गई।
अक्षय डोगर के भाई अजय डोगर का कहना है कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम
सिर्फ सीवरेज और स्लज को अलग करना है, पानी के ट्रीटमेंट की जिम्मेवारी
आईपीएच की है और पानी का आबंटन करने से पहले उसकी जांच करना नगर निगम का
काम है। इस मामले में बेवजह अक्षय डोगर को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
प्लांट का ठेकेदार को भी पीलिया, करवाया टेस्ट
इंदिरा
गांधी मेडिकल कालेज में सोमवार को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के ठेकेदार
अक्षय डोगर छाती में दर्द, खांसी और सांस लेने में शिकायत को लेकर अस्पताल
पहुंचे। आरोपी ठेकेदार अस्पताल में सुबह ग्यारह बजकर चालीस मिनट पर पहुंचा।
अक्षय डोगर को मेडिसन वार्ड के यूनिट वन में भर्ती किया गया है। ठेकेदार
में पीलिया के लक्षण पाए जाने पर डाक्टरों ने उसे एलएफटी टेस्ट लिखा है।
अब एमसी पर जांच की आंच, कई आएंगे लपेटे में
राजधानी
में पीलिया फैलने के मामले में अब जांच की आंच नगर निगम तक पहुंचेगी।
मल्याणा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े अफसरों और ठेकेदार के बाद अब जांच
की सूई निगम की ओर घूम गई है। एसआईटी टीम ने पानी की शुद्धता जांचने के
लिए विशेषज्ञों को भी अपने साथ ले लिया है। आईपीएच के अफसर, कर्मचारी और
प्लांट ठेकेदार की गिरफ्तारी के बाद अब जांच को आगे बढ़ाते हुए आईपीएच के
पानी लिफ्ट कर नगर निगम को दिए जाने और इसके वितरण की पूरी प्रक्रिया की
जांच होगी।
नगर निगम के कई जिम्मेदार अफसर भी अब जांच के दायरे में आ
सकते हैं। पानी की शुद्धता मापने के लिए एक्सपर्ट की मदद से टीम पता
लगाएगी कि शहर में वितरित किए जा रहे पानी को कैसे आईपीएच और नगर निगम
टेस्ट करता था, सैंपल एकत्र करने से लेकर उसे टेस्ट करने की क्या प्रक्रिया
थी। वहीं, नगर निगम अपने स्तर पर सैंपल लेता था या नहीं, यदि लेता था तो
उसमें सैंपल कैसे पास होते रहे। इस पूरे गड़बड़झाले की तह तक जाने की
एसआईटी की तैयारी है।
किसी को नहीं बख्शा जाएगा : एसपी
पुलिस
अधीक्षक डीडब्लू नेगी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि शहर में वितरित किए
जाने वाले पानी की शुद्धता और इसके वितरण की प्रक्रिया की अब जांच होगी।
इसके लिए पानी की शुद्धता मापने वाले एक्सपर्ट और वित्तीय एक्सपर्ट की मदद
से जांच की जाएगी। इसमें पाई जाने वाली खामियों के लिए जो भी जिम्मेदार
होगा उसे बख्शा नहीं जाएगा।
डिप्टी मेयर के बयान दर्ज
एसआईटी ने
सोमवार को पीलिया फैलने के मामले को लेकर पुलिस में शिकायत करने वाले नगर
निगम के डिप्टी मेयर टिकेंद्र सिंह पंवर के बयान दर्ज किए हैं। यह पूछताछ
एसपी ऑफिस में की गई।
एक्सईएन की छाती में दर्द, आईजीएमसी में भर्ती
शहर
में फैले पीलिया मामले में गिरफ्तार आईपीएच के एक्सईएन की छाती में दर्द
उठा है। इन्हें उपचार के लिए आईजीएमसी में भर्ती किया गया है। रविवार देर
शाम इन्हें अस्पताल लाया गया। आपातकालीन वार्ड में मेडिसन डॉक्टरों ने इनकी
जांच की और उसके बाद उन्हें कार्डिक विभाग में उपचार के लिए भेज दिया।
इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एक्सईएन विनोद कुमार का डॉक्टरों की निगरानी में
सीसीयू में उपचार चल रहा है।