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जनमंच में जल शक्ति मंत्री ने चमेरा-तीन परियोजना के खिलाफ एफआईआर के दिए आदेश

Sun, 08 Nov 2020 06:43 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, चंबा/बिलासपुर
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- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना काल के बीच करीब आठ माह बाद शुरू हुए जनमंच कार्यक्रम में जिले के कुंडी में पहुंचे जल शक्ति मंत्री महेंद्र ठाकुर ने चमेरा-तीन परियोजना के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए। यह आदेश उन्होंने तब दिए, जब जनमंच में परियोजना विस्थापितों ने मंत्री के समक्ष अपना दुखड़ा रखा।

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मंत्री ने विस्थापितों की समस्या का जवाब देने के लिए जब परियोजना के जीएम को बात रखने के लिए कहा, तो जीएम वहां मौजूद नहीं थे। उनके स्थान पर एनएचपीसी का अन्य अधिकारी जवाब देने लगा। इस पर मंत्री भड़क उठे। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में जब उन्हें आने के आदेश हुए थे, तो वह क्यों नहीं आए।

इसके लिए उन्होंने मौके पर मौजूद जिला प्रशासन और पुलिस को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। साथ ही विस्थापितों की समस्या जल्द हल करने को कहा। कार्यक्रम में नागेश निवासी चूड़ी ने मंत्री को बताया कि वर्ष 2012 में जिला प्रशासन ने विस्थापितों को नौकरी देने के लिए एनएचपीसी को आदेश दिए थे, लेकिन आज तक रोजगार नहीं मिला। 
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जनमंच में कुछ अन्य विभागों के अधिकारी भी नदारद थे। मंत्री ने कहा कि उनके कार्यक्रम में आने से पहले ही अधिकारी बीमार हो जाते हैं, क्योंकि उनकी लापरवाही को लेकर वह मौके पर ही कार्रवाई करते हैं। इसलिए अधिकारी व कर्मचारी ईमानदारी से डयूटी निभाएं। 

रास्ते में फेंके चावल के पैकेट
कुल्लू जिले के खराहल में जनमंच में लोगों ने समस्याएं हल न होने पर सवाल उठाए। कई शिकायतकर्ता भी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। इसके अलावा कार्यक्रम संपन्न होने पर प्रशासन ने लोगों को सूखे चावल के पैकेट दिए। लोगों ने उन्हें रास्ते में ही फेंक दिया। साथ ही सूखे चावल देने पर सवाल उठाए और रोष जताया। 

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एक साल में 1200 रुपये प्रति क्विंटल गिरे मक्की की फसल के दाम : धवाला

- फोटो : अमर उजाला
सरकार के उद्योग विभाग को ऐसे उद्योग लगाने चाहिएं, जिनमें मक्की से उत्पाद तैयार हों और मक्की की खपत भी बढ़े। इससे आय के साधन बढ़ेंगे वहीं किसानों को सही दाम भी मिलेंगे। यह बात बिलासपुर सदर विस क्षेत्र के चांदपुर में जनमंच में योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष रमेश धवाला ने कही। धवाला ने कहा कि इस वर्ष मक्की के दाम 1200 रुपये प्रति क्विंटल कम मिलने से किसानों को मायूसी हाथ लगी है।

गत वर्ष मक्की का दाम 2200 रुपये प्रति क्विंटल थे, जो कि इस वर्ष 1000 रुपये पहुंच गए। धवाला ने कहा कि जहां पॉपकॉर्न के दाम आसमान छूते हैं, वहीं मक्की के दाम न के बराबर हैं। अगर प्रदेश का उद्योग मंत्रालय ऐसे उद्योग लगाने की पहल करता है, जिनमें मक्की से उत्पाद तैयार हों तो किसानों के साथ प्रदेश की आर्थिकी सुदृढ़ होगी।

उन्होंने कहा कि उद्योग मंत्री को सुझाव दिया था कि मक्की से बीयर तैयार होती है। अगर प्रदेश में सरकार ऐसे उद्योग लगाती है तो मक्की की खपत होगी और किसानों को लाभ होगा। वहीं उन्होंने युवाओं से कहा कि रोजगार के लिए कृषि, डेयरी फार्म व अन्य क्षेत्र में युवा हाथ आजमाएं।
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