पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने हिमकेयर योजना की जांच को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि हिमकेयर को बदनाम करने के नाम पर सरकार जांच का नाटक कर रही है, जबकि लोगों की जान से खिलवाड़ करने वाले नकली दवाओं के रैकेट की विजिलेंस जांच से पीछे हट रही है। जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी विजिलेंस द्वारा जांच में असमर्थता जताने के पीछे आखिर क्या मंशा है।
शिमला से जारी बयान में जयराम ठाकुर ने कहा कि स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने एक जुलाई 2026 को पत्र भेजकर मामले की जांच करने में असमर्थता जताई थी। ब्यूरो की ओर से कहा गया कि मामला वित्तीय रूप से काफी जटिल है और उसके पास पर्याप्त मैनपावर, संसाधन तथा राजस्व विभाग से जुड़े तकनीकी और डोमेन ज्ञान का अभाव है। ऐसे में इतनी व्यापक वित्तीय हेराफेरी की जांच करना मुश्किल है।
नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि यदि विजिलेंस के पास जीएसटी चोरी और नकली दवाओं से जुड़े मामले की जांच का तकनीकी ज्ञान नहीं है, तो हिमकेयर योजना के तहत विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा लिए गए उपचार संबंधी फैसलों की समीक्षा करने का ज्ञान कहां से आ गया। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमकेयर की जांच केवल मुख्यमंत्री के बयानों को सही साबित करने के लिए की जा रही है।
नकली दवाओं और जीएसटी चोरी के आरोपों का मामला
जयराम ठाकुर ने कहा कि एक दवा निर्माता द्वारा नकली दवाओं की बिक्री और जीएसटी चोरी के लिए रिकॉर्ड में हेराफेरी करने के आरोप सामने आए हैं। इसी मामले में न्यायालय के समक्ष एक और प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ, जिसमें कथित तौर पर 27 से 28 टन कच्चे माल की अवैध सप्लाई और जीएसटी चोरी का मामला भी उठाया गया। इस मामले में विस्तृत जांच की मांग की गई थी।
उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं और मुख्यमंत्री के राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ विजिलेंस युद्ध स्तर पर मुकदमे दर्ज कर पूछताछ करती है। कई मामलों में जांच पूरी होने से पहले ही तथ्यों को प्रेस रिलीज के माध्यम से सार्वजनिक कर दिया जाता है। इसके बावजूद इतने गंभीर मामले की जांच से विजिलेंस का किनारा करना सवाल खड़े करता है।