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हिमाचल: जयराम ठाकुर बोले- हिमकेयर की जांच में दिलचस्पी, नकली दवाओं के रैकेट की जांच से असमर्थता क्यों

Mon, 14 Sep 2026 05:57 PM IST
Ankesh Dogra न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार हिमकेयर योजना को बदनाम करने के लिए जांच करवा रही है, जबकि नकली दवाओं और जीएसटी चोरी के गंभीर मामले की विजिलेंस जांच से पीछे हट रही है। उन्होंने एक जुलाई 2026 के विजिलेंस पत्र का हवाला देते हुए मैनपावर, संसाधनों और तकनीकी ज्ञान की कमी पर सवाल उठाए।
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नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने हिमकेयर योजना की जांच को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि हिमकेयर को बदनाम करने के नाम पर सरकार जांच का नाटक कर रही है, जबकि लोगों की जान से खिलवाड़ करने वाले नकली दवाओं के रैकेट की विजिलेंस जांच से पीछे हट रही है। जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी विजिलेंस द्वारा जांच में असमर्थता जताने के पीछे आखिर क्या मंशा है।

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शिमला से जारी बयान में जयराम ठाकुर ने कहा कि स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने एक जुलाई 2026 को पत्र भेजकर मामले की जांच करने में असमर्थता जताई थी। ब्यूरो की ओर से कहा गया कि मामला वित्तीय रूप से काफी जटिल है और उसके पास पर्याप्त मैनपावर, संसाधन तथा राजस्व विभाग से जुड़े तकनीकी और डोमेन ज्ञान का अभाव है। ऐसे में इतनी व्यापक वित्तीय हेराफेरी की जांच करना मुश्किल है।

नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि यदि विजिलेंस के पास जीएसटी चोरी और नकली दवाओं से जुड़े मामले की जांच का तकनीकी ज्ञान नहीं है, तो हिमकेयर योजना के तहत विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा लिए गए उपचार संबंधी फैसलों की समीक्षा करने का ज्ञान कहां से आ गया। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमकेयर की जांच केवल मुख्यमंत्री के बयानों को सही साबित करने के लिए की जा रही है।
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नकली दवाओं और जीएसटी चोरी के आरोपों का मामला
जयराम ठाकुर ने कहा कि एक दवा निर्माता द्वारा नकली दवाओं की बिक्री और जीएसटी चोरी के लिए रिकॉर्ड में हेराफेरी करने के आरोप सामने आए हैं। इसी मामले में न्यायालय के समक्ष एक और प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ, जिसमें कथित तौर पर 27 से 28 टन कच्चे माल की अवैध सप्लाई और जीएसटी चोरी का मामला भी उठाया गया। इस मामले में विस्तृत जांच की मांग की गई थी।

उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं और मुख्यमंत्री के राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ विजिलेंस युद्ध स्तर पर मुकदमे दर्ज कर पूछताछ करती है। कई मामलों में जांच पूरी होने से पहले ही तथ्यों को प्रेस रिलीज के माध्यम से सार्वजनिक कर दिया जाता है। इसके बावजूद इतने गंभीर मामले की जांच से विजिलेंस का किनारा करना सवाल खड़े करता है।

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सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि विजिलेंस और प्रदेश के डीजीपी को तकनीकी और वित्तीय ज्ञान की कमी का हवाला देते हुए पत्र लिखने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने कहा कि यदि जांच एजेंसी के पास इस तरह के मामलों की जांच के लिए पर्याप्त विशेषज्ञता नहीं है, तो सरकार को विशेषज्ञ अधिकारियों और संसाधनों की व्यवस्था करनी चाहिए।

जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि यह सरकार के ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का ऐसा रूप है, जिसमें सत्ता संरक्षित भ्रष्टाचार की जांच से बचने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले भी संगठित भ्रष्टाचार के मामलों में मुख्यमंत्री कार्यालय की संलिप्तता को लेकर सवाल उठ चुके हैं, लेकिन बार-बार सवाल किए जाने के बावजूद मुख्यमंत्री खामोश हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि क्या भारी वित्तीय अनियमितताओं की जांच से मना करना ही सरकार का व्यवस्था परिवर्तन है। क्या मुख्यमंत्री के लिए नकली दवाओं का रैकेट एक ‘नॉर्मल रूटीन’ मामला है या फिर इस मामले की जांच से बचने के पीछे कोई और वजह है।
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