बैठक में अधिकारियों ने बताया कि एचपी शिवा परियोजना के प्रथम चरण के तहत निर्धारित 3,000 हेक्टेयर लक्ष्य में से अब तक 2,612 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित किया जा चुका है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 87 प्रतिशत है। इनमें से 1,543 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण का कार्य पूरा हो चुका है। लगभग 1,000 हेक्टेयर क्षेत्र में जुलाई से सितंबर के बीच पौधरोपण किया जाएगा, जबकि शेष क्षेत्र में जनवरी-फरवरी 2027 के दौरान प्लम और पर्सिमन जैसी शीतकालीन फसलों का रोपण किया जाएगा।
परियोजना के अंतर्गत 331 क्लस्टरों का चयन किया गया है, जिससे प्रदेश के लगभग 10,646 किसान परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। बैठक में बताया गया कि परियोजना का दूसरा चरण भी गति पकड़ रहा है। अब तक लगभग 2,500 हेक्टेयर क्षेत्र की पहचान की जा चुकी है, जबकि 2,153 हेक्टेयर क्षेत्र का सर्वेक्षण जारी है। इसके अलावा 1,200 हेक्टेयर क्षेत्र की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर तकनीकी स्वीकृति के लिए एशियन विकास बैंक (एडीबी) को भेजी गई है। एडीबी से मंजूरी मिलने के बाद अगस्त के अंतिम सप्ताह से निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
जगत सिंह नेगी ने क्षेत्रीय अधिकारियों और परियोजना प्रबंधन इकाई को निर्देश दिए कि परियोजना के सभी घटकों को तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण के सभी क्लस्टरों का समयबद्ध हस्तांतरण सुनिश्चित किया जाए और दूसरे चरण के कार्यों को बिना विलंब शुरू करने के लिए निविदा प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। बैठक में बागवानी विभाग के अतिरिक्त निदेशक विद्या प्रकाश बैंस, एचपी शिवा परियोजना के निदेशक समीर राणा, उप-परियोजना निदेशक (जल शक्ति) विशाल जसवाल, प्रोक्योरमेंट मैनेजर मनोज शर्मा तथा बिलासपुर, हमीरपुर, मंडी, कांगड़ा, सोलन, सिरमौर और ऊना के उपनिदेशक उपस्थित रहे।
बैठक में सौर बाड़बंदी, खेतों की तैयारी, ड्रिप सिंचाई और उठाऊ सिंचाई योजनाओं सहित विभिन्न सिविल कार्यों की प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की गई। समीक्षा में मंडी, हमीरपुर और ऊना जिलों में कार्यों की प्रगति संतोषजनक पाई गई। वहीं सोलन, सिरमौर, बिलासपुर और कांगड़ा जिलों में ड्रिप सिंचाई कार्यों में देरी और ठेकेदारों द्वारा पर्याप्त श्रमिक उपलब्ध नहीं कराने के कारण प्रगति धीमी रही। कार्यों में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर दो ठेकेदारों पर पेनल्टी भी लगाई गई है।