ये सौर ऊर्जा बस मॉडल बनाने वालोें की मानें कि इस प्रारूप के इस्तेमाल से ध्वनि और वायु प्रदूषण नहीं होगा और सफर भी सस्ता होगा। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान मंडी (ग्रेड-ए) के प्रधानाचार्य ई शिवेंद्र डोगरा ने बताया कि ये मॉडल सोसायटी ऑफ ऑटोमोबाइल इंजीनियर्स के मानकों के तहत बना है।
इसकी अप्रूवल मिल चुकी है। ऐसी नवीनीकरण ऊर्जा के इस्तेमाल से गाड़ी की बैटरी बार-बार चार्ज नहीं करना पड़ेगी। वर्तमान में इलेक्ट्रिक बसें एचआरटीसी के बेड़े में शामिल हो चुकी हैं। ये बसें मंडी, कुल्लू और मनाली में दौड़ रही हैं।
आरएम मंडी गोपाल शर्मा के अनुसार इलेक्ट्रिक बस में 12 से 14 बैटरियां होती हैं। एक बैटरी एक घंटे में चार्ज होती है और 200 किलोमीटर तक चलती है।
मोटर व्हीकल ट्रेड के अनुदेशक रविंद्र नायक ने बताया कि इस मॉडल पर समूह अनुदेशक भीम दास, लता देवी के अतिरिक्त छात्र नामत प्रवल वर्मा, मनीश
कुमार, ललित ठाकुर, हितेश शर्मा, हितेश वर्मा, वीरेंद्र कुमार, अनमोल शर्मा, नितेश कुमार, जतिन रावत, गजराज और विशाल ने काम किया है। आधुनिक युग में विभिन्न तरह की ऑटोमोबाइल कंपनियां बीएस-4 गाड़ियों बना रही हैं। इस विषय पर विचार करते हुए सोलर बस का वर्किंग माडल तैयार किया है।