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आउटसोर्स एजेंसियों से रिकवरी करेगी हिमाचल सरकार, जानिए पूरा मामला

Wed, 13 Feb 2019 12:12 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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प्रदेश की सिंचाई स्कीमों में तैनात आउटसोर्स कर्मियों की लापरवाही से पंप व अन्य उपकरण खराब होने पर सरकार सख्त रुख अपनाने जा रही है। आईपीएच मंत्री ठाकुर महेंद्र सिंह ठाकुर ने विधानसभा में एलान किया कि आउटसोर्स पर दी गई योजनाओं में खराब हुए पंप और अन्य उपकरणों को ठीक कराने के लिए अब आउटसोर्स एजेंसियों से रिकवरी की जाएगी।

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सीपीएम विधायक राकेश सिंघा के एक सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि यह बात सही है कि प्रदेश की 564 स्कीमें आउटसोर्स आधार पर चल रही हैं। लेकिन सरकार और स्कीमों को आउटसोर्स आधार पर चलाने की इच्छुक नहीं है। लेकिन चूंकि विभाग में वर्तमान में दस हजार एक सौ दो पद रिक्त पडे़ हैं। इसलिए मजबूरन आउटसोर्सिंग के जरिये स्कीमों को चलाया जा रहा है।

हालांकि उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार इन रिक्त पदों को भरने व नई बनने वाली स्कीमों के साथ ही नए पद सृजित करने व भरने को लेकर भी विचार कर रही है। इस संबंध में मुख्यमंत्री को निर्णय लेना है और निर्णय होते ही आगे की कार्रवाई शुरू हो जाएगी। इससे पहले सिंघा ने चिंता जताई थी कि योजनाएं आउटसोर्स पर देने से सरकारी उपकरणों की दुर्गति हो रही है। आरोप लगाया कि आउटसोर्स कर्मचारी लापरवाही करते हैं जिसके चलते सरकार के करोड़ों के पंप और उपकरण फूंक रहे हैं और इस पर किसी की जवाबदेही नहीं है। 

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51,228 बच्चों को नहीं मिली एससी/एसटी छात्रवृत्ति

हिमाचल सरकार पिछले साल से लेकर 15 जनवरी 2019 तक अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के 51,228 बच्चों को अब तक छात्रवृत्ति नहीं दे सकी है। प्रदेश सरकार ने विधायक नंदलाल के प्रश्न के लिखित जवाब में यह जानकारी दी है।

सरकार ने बताया कि इन बच्चों को केंद्र सरकार से बजट मिलने के बाद ही छात्रवृत्ति जारी की जाएगी। साथ ही छात्रवृत्ति के लिए संबंधित संस्थान जरूरी दस्तावेज नियमों के अनुसार सरकार को भेजेंगे।

सरकार ने यह जवाब ऐसे समय में दिया है, जब प्रदेश में छात्रवृत्ति घोटाले को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। सरकार ने कथित घोटाले की जांच के लिए सीबीआई को पत्र भी लिख दिया है। हालांकि, जांच एजेंसी ने अभी तक जांच को लेकर सरकार को कोई जवाब नहीं दिया है।

सिर्फ लोकमित्र केंद्र और सीएससी में कराएं पंजीकरण

बिना डब्ल्यूटीपी चल रहीं 381 पेयजल योजनाएं
प्रदेश की 381 पेयजल योजनाएं बिना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के चल रही हैं। यह जानकारी प्रदेश सरकार ने विधायक रमेश ध्वाला के सवाल के लिखित जवाब में दी है। सरकार ने बताया कि इन प्लांटों का निर्माण धन की उपलब्धता पर निर्भर करता है। साथ ही यह भी बताया कि पानी को साफ रखने के लिए पिछले तीन साल में 3.49 करोड़ रुपये का 2261 मीट्रिक टन ब्लीचिंग पाउडर खरीद व उपयोग किया गया। 

प्रदेश सरकार ने विधानसभा में विधायक अर्जुन सिंह के सवाल के लिखित जवाब में जानकारी दी है कि प्रदेश में सिर्फ लोकमित्र केंद्र व कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) को ही प्रदेश में चल रही आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना व हिमाचल हेल्थ केयर योजना (हिमकेयर) के कार्ड बनाने के लिए अधिकृत किया गया है।

बताया कि इसके अलावा किसी भी अन्य एजेंसी या एनजीओ को अधिकृत नहीं किया गया है। इन केंद्रों पर लोग तीस रुपये प्रति परिवार देकर आयुष्मान भारत योजना व 50 रुपये प्रति परिवार देकर हिमकेयर का कार्ड बनवा सकते हैं। वहीं, बताया कि भडियारा स्थित सीएससी के खिलाफ सीएमओ कांगड़ा के माध्यम से सरकार ने मामला दर्ज कराया है।

नए सेब सीजन से पहले अपग्रेड नहीं होगा एक भी सीए स्टोर

 प्रदेश सरकार नए सेब सीजन तक एक भी सीए स्टोर को अपग्रेड नहीं कर पाएगी। यह जानकारी प्रदेश सरका ने विधानसभा में विधायक राकेश सिंघा के सवाल के लिखित जवाब में दी है।

सरकार ने बताया कि बागवानी विकास के लिए विश्व बैंक से पोषित 1138 करोड़ के प्रोजेक्ट को सात साल निवेश प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग के तहत वित्त पोषण मिला है।

प्रोजेक्ट लागू करने का एग्रीमेंट केंद्र, प्रदेश सरकार व विश्व बैंक के बीच 21 जून 2016 को हुआ था। सरकार ने बताया कि प्रदेश में बागवानी विकास के लिए प्रोजेक्ट के तहत सरकार ने दिसंबर 2018 तक 5635 लाख रुपये खर्च कर दिए हैं।

इसमें बागवानी उत्पादन व विविधीकरण के लिए 32.89 करोड़, वैल्यू एडीशन एंड एग्री एंटरप्राइज डेवलपमेंट पर 4.6 करोड़, मार्केट विकास पर 39 लाख, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, मानीटरिंग, लर्निंग पर 19 करोड़ शामिल है। इसके अलावा कई अन्य कंपोनेंट पर भी पैसा खर्च किया जाना शेष है। 
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एक साल में 128 कामगार हुए बेरोजगार

सोसायटी के कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए नीति नहीं
प्रदेश सरकार ने विधायक विनय कुमार के अतारांकित प्रश्न के लिखित जवाब में जानकारी दी है कि वर्तमान में विभिन्न स्वास्थ्य सोसायटियों में 1334 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें 749 कर्मचारी ऐसे हैं जो तीन साल से ज्यादा का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। लेकिन सरकार के पास सोसायटी में नियुक्त कर्मियों को नियमित करने के लिए नीति नहीं है, ऐसे में अभी उनका रेगुलराइजेशन नहीं किया गया है।

प्रदेश में पिछले एक साल में सात औद्योगिक इकाइयों के बंद होने से 128 कामगार बेरोजगार हुए हैं। यह जानकारी प्रदेश सरकार ने विधायक मुकेश अग्निहोत्री के अतारांकित प्रश्न के लिखित जवाब में दी है। सरकार ने कहा कि औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने व उद्योगों को बंद होने से बचाने के लिए औद्यानिक मित्र वातावरण तैयार कर रही है। इसके तहत निवेश संबंधी नियमों व प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जा रहा है ताकि उद्योग चलाने में उद्योगपतियों को दिक्कत का सामना न करना पड़े। 
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