विशेषज्ञों के अनुसार इटली से लाए गए इन पौधों का पहले नौणी विश्वविद्यालय में शोध किया गया। उद्यान विभाग के उद्यान विकास अधिकारी डॉ. दिनेश ठाकुर ने बताया कि बागथन में इस वर्ष करीब 90 हजार सेब के पौधे तैयार किए जा रहे हैं। जनवरी व फरवरी महीने में यह पौधे बागवानों को दिए जाएंगे।
यह सेब 32 से 34 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी हो सकता है। इस सेब के पौधे जिन बागवानों ने 2017 में लिए थे, वर्ष 2018 में वह फल देने लगे। यानी ये पौधे एक वर्ष में ही फल दे देते हैं, पांच साल में सेब का एक पेड़ 40 से 50 किलोग्राम सेब की पैदावार तैयार करता है।
बाजार में मिलते हैं बेहतर दाम
अन्य फलों की अपेक्षा इटली से आ रही प्रजाति के सेब के बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं। अन्य प्रजाति के सेब से पहले ही इस पौधे की फसल आती है। डॉ. दिनेश ठाकुर ने बताया कि हाल ही में हुए सेब सीजन में इटली की प्रजाति के सेब की कीमत रॉयल प्रजाति के सेब से 20 फीसदी अधिक रही है।