अस्पतालों में जेनेरिक दवाइयां न लिखने वाले डाक्टर नपेंगे। प्रदेश सरकार ने इस बाबत अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए हैं। प्रदेश सरकार को शिकायतें मिल रहीं हैं कि डाक्टर जेनेरिक दवाइयां लिखने की बजाय रोगियों की पर्ची में ऐसी दवाइयां लिख रहे हैं जो इन केंद्रों में नहीं मिल रहीं हैं। मजबूरन लोगों को निजी दवा दुकानों में महंगी दरों में दवाइयां खरीदनी पड़ रहीं हैं।
केंद्र सरकार की ओर से तय मानकों के अनुसार डाक्टरों को जेनेरिक दवाइयां लिखनी अनिवार्य है। अस्पतालों के बाहर सरकार ने जन औषधि केंद्र खोले हैं। इन केंद्रों में 250 के करीब दवाइयां उपलब्ध कराई गई हैं। सर्दी जुकाम से लेकर पेट दर्द जैसी बीमारियों की दवाइयां इन केंद्रों में दी जा रही हैं।
लेकिन पर्ची में इन बीमारियों की दवाइयां लिखने की बजाय सबस्टीच्यूट लिखा जा रहा है। जो निजी दवा दुकानों में मिलतीं हैं। ऐसे में जहां मरीजों की जेबें ढीली हो रही हैं वहीं निजी दवा विक्रेताओं को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
प्रदेश सरकार को शिकायत मिल रही है कि डाक्टर जेनेरिक दवाइयां नहीं लिख रहे हैं। इससे मरीजों को महंगी दामों पर बाहरी से दवाइयां खरीदनी पड़ रहीं हैं। अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वह इस मामले को गंभीरता से लें।
- विपिन परमार, स्वास्थ्य मंत्री