इराक में चल रहे गृह युद्ध के चलते 12 हिमाचली भी एक कंपनी में फंस गए हैं। मसईब में सदरतल इल इंडिया के तहत अलफराज कंपनी में इस समय कुल 28 भारतीय फंसे हुए बताए जा रहे हैं।
यहां काम करने वाले जिला मंडी की हल्यातर पंचायत के युवक सुंदर लाल ने बताया कि उसके साथ 28 हिंदुस्तानी इस कंपनी में फंसे हैं। उपमंडल के मंगलवाणा (हराबाग) निवासी टेकंचद पुत्र लुहारू राम भी एक बंद कमरे में तीन महीनों से स्वदेश लौटने की बाट जोह रहा है।
पिता लुहारु राम ने बताया बीती रात टेकचंद ने फोन पर बताया कि यहां दस अन्य राज्यों के लोगों के साथ एक कमरे में तीन महीने से रह रहा है। उन्हें कभी एक दिन तो कभी दो दिन बाद भोजन और पानी मिलता है।
कंपनी ने जब्त कर रखे हैं दस्तावेज
इन युवकों का कहना है कि जिस कंपनी में वे एक वर्ष पूर्व गए थे वह कंपनी तीन महीने से न वेतन दे रही और न ही पासपोर्ट। यहां तक की कंपनी का कोई भी नुमाइंदा उनसे मिलने नहीं आ रहा।
टेकचंद ने बताया कि वे इराक की तहसील अलसतादिया जिला नसरिया के किसी हिस्से में रह रहे हैं। वे एक वर्ष पूर्व अलनाहर अलजाहर कंपनी में कार्य करने हेतु गए थे। लेकिन अब कंपनी ने उन्हें लावारिस छोड़ दिया है।
टेकचंद ने परिजनों को बताया कि जो उन्हें खाना देने व्यक्ति आता है उसके फोन से ही वह घर पर संपर्क कर रहा है। उन्हें कहां रखा है उन्हें कुछ मालूम नहीं है। मालूम नहीं कि उनके साथ अगले दिन क्या होने वाला है। कमरे के बाहर क्या हो रहा है उन्हें कुछ पता नहीं चल रहा है।
अपनों के घर लौटने का इंतजार कर रहे हैं परिजन
उधर, इराक में फंसे टेकचंद के मां, बाप, भाई बहन और पत्नी तथा बच्चे भगवान से टेकचंद के सकुशल घर पहुंचने की दुआ कर रहे हैं। टेकचंद ने बताया उसके साथ दस लोग पंजाब, राजस्थान, केरल राज्यों के हैं।
पिता लुहारु राम और अन्य परिजनों ने प्रदेश तथा केंद्र सरकार से मांग की है कि उनके लाडले को शीघ्र घर पहुंचाया जाए। डीसी देवेश कुमार ने बताया कि सुंदरनगर क्षेत्र से सात परिवार ही उनसे मिले हैं जिनके परिवार के सदस्य इराक में फंसे हैं।