शहर के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों में काम करने वाले मजदूर हड़ताल पर चले गए हैं। इससे पहले केवल गोल्छा प्लांट के मजदूर मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे थे। अब शहर के दूसरे प्लांटों के मजदूरों ने मांगों को लेकर आवाज उठा दी है। भड़के मजदूरों ने सीटू के बैनर तले आईपीएच के इंजीनियर इन चीफ के कार्यालय में घुसकर प्रदर्शन किया।
मजदूरों की हड़ताल के कारण सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों में काम ठप रहा। पानी की बिना ट्रीट किए नालों में बहाया गया। इससे एक बार फिर राजधानी में पीलिया फैलने की आशंका जताई जा रही है। हड़ताल के दौरान सभी ट्रीटमेंट प्लांटों के 75 वर्करों ने काम न करना का ऐलान किया। जबकि आईपीएच विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए।
वर्करों का आरोप है कि उन्हें फिर से ठेकेदार के अधीन किया गया है। ठेकेदारों की लापरवाही के चलते काफी लोगों की जान जा चुकी है। जबकि, हजारों लोग पीलिया रोग की चपेट में आ चुके हैं। शहर के सैकड़ों लोगों को करीब दो माह तक बिना ट्रीट पानी पीना पड़ा था। जिसके कारण ऑफिशयल रिकार्ड के मुताबिक पंद्रह सौ लोग एलएफटी टेस्ट करवाने पर पॉजिटिव पाए गए।
जबकि बीस से अधिक लोग पीलिया रोग होने पर मौत हो गई थी। सीटू राज्य सचिव विजेंद्र मेहरा ने बताया कि प्लांटों में श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मजदूरों को ईपीएफ, ईएसआई, बोनस, आईकार्ड सहित मिलने वाली छुट्टियों से वंचित होना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि मजदूरों को समय पर वेतन नही मिल पा रहा है।
प्रदर्शन में बाबू राम, बालकराम, दयाल, राधेश्याम, धनेश, मनोज, राकेश, केवल राम, देवराज, मोहन, जगदीश, भारत भूषण, संदीप, ललित, सत्या सहित अन्य लोग मौजूद रहे। जिला सचिव बाबू राम और यूनियन अध्यक्ष राधे श्याम ने कहा कि जब तक मजदूरों की मांगों को नहीं माना जाता है हड़ताल जारी रहेगी।
प्लांटों में काम रहेगा बंद
सीटू के राज्य सचिव विजेंद्र मेहरा ने कहा कि जब तक प्लांट में काम कर रहे वर्करों को आईपीएच के अधीन नहीं किया जाता है और अन्य मांगों को पूरा नहीं किया जाता है। मजदूरों की हड़ताल जारी रहेगी।
यह है ट्रीटमेंट प्लांट- लालपानी, मल्याणा, ढली, बरमू, गोल्छा और समरहिल