राजधानी में जल संकट से हाहाकार मचा है। समस्या को सुलझाना तो दूर अफसर आईपीएच मंत्री के सामने एक दूसरे पर समस्या का ठीकरा फोड़ने लग पड़े। मंत्री ने भी अफसरों को आपस में तालमेल बनाने की सलाह दी। ऐसे में बैठक औपचारिकता बनकर रह गई।
मंत्री के निर्देशों से लग रहा है कि अफसरों में तालमेल नहीं, तो फिर जल संकट तो होगा ही। सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स ने आनन फानन में वीरवार को सचिवालय में आईपीएच और नगर निगम के अफसरों को तलब किया। इसमें सबसे रिपोर्ट मांगी गई।
मंत्री ने बार-बार बैठक करने के बाद भी पानी की समस्या गहराने पर जब तल्खी दिखाई तो आईपीएच महकमे के अफसरों ने अपनी जान बचाते हुए वन महकमे और बिजली बोर्ड पर ठीकरा फोड़ दिया। अफसरों ने कहा कि जल स्रोतों के आसपास अवैध तौर पर मलबा फेंका गया है।
वन विभाग की अनदेखी के चलते बरसात के दौरान सारा मलबा जल स्रोतों में जाकर पानी को मटमैला कर रहा है। इसके अलावा बिजली बोर्ड की ओर से बार-बार कट लगाए जाते हैं। इसके चलते पंपिंग प्रभावित होती है। अन्य विभागों ने जान बचाते हुए जल संकट को दूर करने के लिए तीन दिन का समय मांगा।
इस दौरान मंत्री विद्या स्टोक्स ने आईपीएच, नगर निगम, वन विभाग और बिजली बोर्ड को आपस में तालमेल बनाने को कहा। इस पर आईपीएच महकमे के अफसरों ने एक सप्ताह के भीतर सभी विभागों के अधिकारियों के साथ दोबारा से मंत्री के समक्ष पेश होने की हामी भी भरी।
पानी के लिए त्राहि-त्राहि जैसे हालात
वहीं, राजधानी में जल संकट बरकरार है। पानी के लिए त्राहि-त्राहि जैसे हालात पैदा हो गए हैं। कई क्षेत्रों में तीन दिन से पानी सप्लाई नहीं मिल रही। वीरवार को भी आधे से अधिक शहर में पानी की सप्लाई नहीं हो सकी। सिर्फ चौड़ा मैदान जोन में दो दिन बाद पानी की सप्लाई दी गई।
वीरवार सुबह नगर निगम को मात्र 27 एमएलडी पानी की सप्लाई प्राप्त हुई है। इस कोटे ने नगर निगम ने दो दिन से जल संकट से जूझ रहे चौड़ा मैदान जोन में सप्लाई दी। इसके अलावा छोटा शिमला जोन के कुछ क्षेत्रों में सुबह पानी दिया गया। नगर निगम का कहना है कि जहां पानी नहीं आया है, वहां शुक्रवार को पानी दिया जाएगा।