प्रदेश में रोप-वे के निर्माण की योजना पूरी होते नहीं दिख रही हैं। सरकार ने तीन रोप-वे के लिए तीसरी बार टेंडर आमंत्रित किए, लेकिन किसी भी निवेशक ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। शुक्रवार को भागसूनाग से त्रियुंड, टोबा से नयनादेवी और शाहतलाई से दियोटसिद्ध तक प्रस्तावित रोप-वे के निर्माण को टेंडर बुलाए थे।
तय तारीख तक किसी भी निवेशक ने आवेदन नहीं किया। निवेशकों की इस बेरुखी से प्रदेश में पर्यटन विकास और यातायात के नए साधन शुरू करने की योजना को बड़ा झटका लगा है। अब चौथी बार टेंडर आमंत्रित करने को विभाग ने सरकार से मंजूरी मांगी है। पहले 13 अक्तूबर और 16 नवंबर को टेंडर आमंत्रित किए थे। इस दौरान किसी भी निवेशक ने उपस्थिति दर्ज नहीं करवाई।
सरकार ने बीते साल प्रदेश में पांच रोप-वे बनाने की योजना तैयार की थी। दो रोप-वे के प्रोजेक्ट का काम आवंटित कर दिया है। इसमें पलचान से रोहतांग और धर्मशाला रोप-वे प्रोजेक्ट शामिल हैं। शेष तीन रोप-वे सिरे नहीं चढ़ पा रहे हैं। इनका निर्माण पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) में होना है। निवेशक के पास 40 साल तक रोप-वे रहेगा। 40 साल बाद रोप-वे सरकार के अधीन आएगा। इनके निर्माण से हिमाचल में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
सूबे की सर्पीली सड़कों की चढ़ाई-उतराई से होने वाली थकान से भी लोगों को निजात मिलेगी। चंद मिनटों में रोप-वे से सफर हो सकेगा। प्रदेश के अनछुए पर्यटक स्थलों से भी लोग रूबरू हो सकेंगे। फिलहाल, यह सपना पूरा होता नहीं दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक निर्माण लागत अधिक होने की आशंका के चलते निवेशक टेंडर प्रक्रिया में भाग नहीं ले रहे हैं।
रोप वे भागसूनाग से त्रियुंड, जिला-कांगड़ा, अनुमानित दूरी-3.06 किलोमीटर
रोप वे टोबा से नयनादेवी, जिला-बिलासपुर, अनुमानित दूरी-2.40 किलोमीटर
रोप वे शाहतलाई से दियोटसिद्ध, जिला-हमीरपुर, अनुमानित दूरी-1.85 किलोमीटर