एचएएस टॉपर अपराजिता चंदेल जिला बिलासपुर की झंडूता तहसील के गांव भंजवाणी डाकघर औहर की रहने वाली हैं। अपराजिता ने एचएएस बनने के लिए चार बार पेपर दिए, लेकिन प्रयास सफल नहीं होने पर जिद नहीं छोड़ी। अब पांचवें प्रयास में टॉप किया है।
वर्तमान में रक्षा मंत्रालय में सेक्शन ऑफिसर के पद पर नियुक्त अपराजिता चंदेल के पिता राकेश चंदेल जिला अस्पताल बिलासपुर में फार्मासिस्ट और माता मीना चंदेल जिला अस्पताल हमीरपुर में वार्ड सिस्टर के पद पर तैनात हैं। अपराजिता ने स्कूली शिक्षा बिलासपुर और हमीरपुर से प्राप्त की हैं।
जिला कांगड़ा के शाहपुर की स्वाति डोगरा ने चौथे प्रयास में एचएएस की परीक्षा पास की है। स्वाति ने बताया कि पापा वेणु गोपाल डोगरा का सपना था कि बेटी प्रशासनिक अधिकारी बने, जिसे आज पूरा कर लिया है।
डीएफओ पद पर सेवाएं दे चुके पिता और माता रीता डोगरा की मेहनत के चलते आज दूसरा स्थान प्राप्त कर इस मुकाम तक पहुंची हूं। स्वाति ने प्रारंभिक शिक्षा डीएवी स्कूल धर्मशाला और कॉलेज की शिक्षा धर्मशाला कॉलेज से प्राप्त की है। पंजाब विवि से एमएससी की है। नेट और जेआरएफ भी पास किया है।
जिला शिमला के रोहड़ू की रहने वाली प्रिया नागटा ने पहले ही प्रयास में एचएएस की परीक्षा में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। प्रिया का कहना है प्रदेश की सेवा करने के जज्बे ने उनका हौसला बढ़ाया है। देहरादून से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद प्रिया ने हिंदू कॉलेज दिल्ली से इंग्लिश आनर्स की है।
पिता बलवंत सिंह नागटा कारोबार करते हैं। माता गीता नागटा घर संभालती हैं। प्रिया ने बताया कि बचपन से ही प्रशासनिक सेवाओं में जाने की इच्छा थी। कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ ही प्रशासनिक सेवाओं की परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी।
धर्मशाला के रामनगर की निवासी स्वाति गुप्ता ने बीते साल भी एचएएस की परीक्षा पास की थी। उस दौरान इन्हें जिला कोषाधिकारी का पद मिला था लेकिन लक्ष्य एचएएस बनना था। ऐसे में पद नहीं संभाला। दोबारा परीक्षा की तैयारियां की और अब चौथा स्थान प्राप्त किया है।
वर्तमान में स्वाति जिला शिमला में वेटरनेरी डॉक्टर के पद पर सेवाएं दे रही हैं। धर्मशाला से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त कर पालमपुर से वेटरनेरी डाक्टर की डिग्री हासिल की। स्वाति की माता पुष्पा गुप्ता सेवानिवृत्त शिक्षिका हैं, पिता कपिल गुप्ता स्कूल शिक्षा बोर्ड से सेवानिवृत्त हैं।
जिला मंडी के मट्ठी बनवार के 22 वर्षीय रजनीश शर्मा ने एचएएस परीक्षा में पांचवां स्थान हासिल किया है। रजनीश की प्रारंभिक शिक्षा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला धर्मपुर और दसवीं व जमा दो की पढ़ाई कुल्लू के भारत भारती पब्लिक स्कूल से हुई है।
पंजाब विवि में बीएससी (ऑनर्स) में गोल्ड मेडलिस्ट है। चंडीगढ़ में ही पुस्तकालय में अध्ययन कर यह मुकाम हासिल किया। रजनीश ने बताया कि वे शुरू से ही प्रशासनिक अधिकारी बनना चाहते थे। पिता यशपाल शर्मा कुल्लू जिला ग्रामीण विकास अभिकरण एजेंसी में सहायक नियंत्रक वित्त के पद पर तैनात है जबकि माता संध्या देवी गृहिणी हैं।
जिला मंडी के सरकाघाट निवासी रोहित शर्मा ने 23 साल की उम्र में एचएएस की परीक्षा में छठा स्थान प्राप्त किया है। रोहित ने वेटरनेरी डॉक्टर की डिग्री प्राप्त की है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी बनने के सपने के चलते डॉक्टर बनने की जगह एचएएस की परीक्षा पास करने को तैयारियां जारी रखीं।
रोहित के पिता सुरेंद्र गणित विषय के प्रवक्ता हैं। माता नीलम शर्मा भी शिक्षिका हैं। रोहित ने प्रारंभिक शिक्षा हमीरपुर के सावित्री पब्लिक स्कूल और हिम एकेडमी स्कूल से प्राप्त की है। रोहित ने बताया कि प्रशासनिक अधिकारी बन कर वे प्रदेश की सेवा करना चाहते हैं।
हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा से बीडीओ बने गुनजीत सिंह अब एसडीएम बन गए हैं। पदोन्नति की बजाय एचएएस की परीक्षा में अपना प्रदर्शन सुधारकर गुनजीत सिंह ने यह सफलता हासिल की है। एचएएस के सोमवार को घोषित परिणाम में गुनजीत सिंह ने नौवां स्थान हासिल किया है।
उपमंडल जवाली के तहत आबल पंचायत के वासा गांव के रहने वाले गुनजीत सिंह का जन्म 25 दिसंबर 1988 को हुआ। गुनजीत सिंह की प्राथमिक शिक्षा केंद्रीय विद्यालय पटियाला और जमा दो की परीक्षा भी केंद्रीय विद्यालय पटियाला से ही पास की।
बाद में राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज बठिंडा में इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की। पांच साल इनफोसिस लिमिटेड चेन्नई में सेवाएं दीं। नौकरी के साथ ही एचएएस की तैयारी भी की। साल 2015 में पहली बार एचएएस की परीक्षा दी।
साल 2016 में बतौर बीडीओ कार्यभार धर्मपुर (मंडी) में अपनी सेवाएं शुरू कीं, जबकि अगस्त 2018 में पांवटा साहिब में बीडीओ का कार्यभार संभाला। दोबारा एचएएस की परीक्षा दी और अपने प्रदर्शन में सुधार करके एसडीएम पद हासिल किया है।
गुनजीत सिंह के पिता लखवीर सिंह चीमा रेलवे बोर्ड में बतौर इंजीनियर सेवानिवृत्त हुए हैं, जबकि माता उषा चीमा गृहिणी हैं। माता-पिता सहित परिजनों में खुशी की लहर है। गुनजीत सिंह ने बताया कि जनता की सेवा करना मुख्य ध्येय रहेगा। हर समय जनता की सेवा करने के लिए तैयार रहूंगा।
ऊना के चिंतपूर्णी के धालवारी गांव की रहने वाली अरशिया शर्मा अब अपने पिता की तरह आबकारी एवं कराधान विभाग में अपनी सेवाएं देंगी। अरशिया ने सोमवार को निकले रिजल्ट में आबकारी एवं कराधान अधिकारी के तौर पर स्थान हासिल किया है।
अरशिया के पिता सतीश शर्मा वर्तमान में आबकारी विभाग में उप आयुक्त के पद पर तैनात हैं। अरशिया ने पिछले साल जून में प्रारंभिक परीक्षा पास की थी। इसके बाद नवंबर में मेन्स उत्तीर्ण कर मार्च में हुए साक्षात्कार को भी पास कर लिया।
शिमला के लॉरेटो कान्वेंट ताराहाल स्कूल से दसवीं और 12वीं की पढ़ाई करने वाली अरशिया ने जेपी यूनिवर्सिटी वाकनाघाट से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया है। अरशिया ने अपनी सफलता का श्रेय पिता को दिया है।
कहा कि वह भी पिता की तरह आबकारी विभाग में सेवाएं देना चाहती थीं। पिता की गाइडेंस में ही उन्होंने इसके लिए तैयारी की और परीक्षा पास कर ली। पिता सतीश शर्मा ने कहा कि अरशिया ने इसके लिए काफी मेहनत की और पहले ही प्रयास में ईटीओ परीक्षा पास कर ली।
जिला मुख्यालय के वार्ड-8 नयानगर निवासी शिखा राणा ने हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवाएं परीक्षा उत्तीर्ण की है। शिखा अब बतौर तहसीलदार सेवाएं देंगी। इससे पूर्व वर्ष 2017 में शिखा ने हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग से ऑडिटिंग इंस्पेक्टर की परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
वर्ष 2017 से उन्होंने सहकारिता विभाग में ऑडिटिंग इंस्पेक्टर के पद पर सेवाएं दी। वह सिविल सर्विसिस की तैयारी भी करती रहीं। शिखा ने कामयाबी का श्रेय माता-पिता, भाई-बहन व कार्यालय के स्टाफ सदस्यों को दिया है।
शिखा के पिता बिजली बोर्ड से बतौर असिस्टेंट एग्जिक्यूटिव इंजीनियर सेवानिवृत्त हैं। माता गृहिणी हैं। शिखा ने कहा कि उनके माता-पिता ने हर कदम पर उन्हें स्पोर्ट किया है। शिखा की प्रारंभिक पढ़ाई ब्लू स्टार सीनियर सेकेंडरी स्कूल हमीरपुर से हुई है।
उन्होंने वर्ष 2014 में पीजीआई चंडीगढ़ से बैचलर ऑफ फिजियोथैरेपी की डिग्री हासिल की। वर्ष 2014 के बाद उन्होंने सिविल सर्विसेस में जाने का सोचा और तैयारी आरंभ कर दी। अब उन्होंने परीक्षा उत्तीर्ण कर अपने लक्ष्य को हासिल किया है। शिखा रोजाना पांच से आठ घंटे पढ़ाई करती रही हैं।
जिला सिरमौर के पांवटा वार्ड-12 के आशीष चौहान ने एचएएस परीक्षा पास कर ली है। आशीष ने पांवटा के गुरु नानक मिशन पब्लिक स्कूल पांवटा से नॉन मेडिकल में 12वीं की पास की थी। इसके बाद तमिलनाडु से इंजीनियरिंग की। एक वर्ष तक निजी कंपनी में नौकरी की, लेकिन एचएएस की परीक्षा तैयारियों के लिए नौकरी छोड़ दी। अब उन्हें हिमाचल में ईटीओ का पद मिला है।
अमर उजाला से बातचीत में आशीष चौहान ने कहा कि पिता आरएस चौहान सहकारी बैंक के शिमला स्थित मुख्य कार्यालय में एजीएम के पद पर कार्यरत हैं। मां आशा चौहान स्वास्थ्य विभाग में फीमेल हेल्थ वर्कर हैं। छोटा भाई आयुष चौहान एलएलबी कर रहा है। वर्ष 2009 में गुरु नानक मिशन स्कूल पांवटा से नॉन मेडिकल में जमा दो की परीक्षा पास की है। इसके बाद एक वर्ष कोटा में रहे।
वर्ष 2010 से 14 तक तमिलनाडु के वैलोर वीआईटी विवि से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की है। एक वर्ष तक प्रतिष्ठित निजी कंपनी आईटी सेक्टर में नौकरी भी की। इसके बाद आईएएस व एचएएस परीक्षा की तैयारियों के लिए नौकरी छोड़ दी। यूपीएस, आईएएस की परीक्षाएं दी। चौथे प्रयास में एचएएस परीक्षा पास की। आशीष ने बताया कि उन्हें ईटीओ का पद मिला है।