प्रशासक की भूमिका निभा रहीं प्रो. ममता
शिमला। एचपीयू के लोक प्रशासन विभागाध्यक्ष प्रो. ममता मोक्टा अपने पढ़ाने और विभाग को संचालित करने के साथ ही विवि के अधिष्ठाता अध्ययन जैसे वैधानिक पद पर सेवाएं दी रही हैं। परिवार की जिम्मेवारी के साथ ही उन्होंने बतौर प्रशासक भी अपने आप को साबित किया है। हाल ही में प्रो. मोक्टा को वी. भास्कर रॉव लाइफ टाइम एचीवमेंट अवाॅर्ड मिला है। 33 साल का शैक्षणिक अनुभव रखती हैं। कॉलेज में 13 साल तक शिक्षण कार्य करने के बाद वे विवि के लोक प्रशासन विभाग में पढ़ा रही हैं। 83 से अधिक लेख अंतरराष्ट्रीय जर्नल में लिख चुकी हैं। 12 छात्रों की पीएचडी में गाइड रह चुकी है। वे सामाजिक कार्यों में भी हमेशा आगे रहती है।
सामाजिक, सांस्कृतिक क्षेत्र में भी बदलाव की वाहक बनीं
महिला अधिकारियों का प्रभाव केवल सरकारी विभागों तक सीमित नहीं है, बल्कि ये सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में भी बदलाव की वाहक बन रही हैं। वे महिला सशक्तीकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, और सुरक्षा के मामलों में लगातार सुधार की दिशा में काम कर रही हैं। कई महिला अधिकारियों ने महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को सशक्त करने के लिए विशेष योजनाओं की शुरुआत की है, जो उन्हें आर्थिक, सामाजिक और मानसिक रूप से सशक्त बना रही हैं।
प्रदेश की पहली महिला सर्जन डाॅ. सीमा, लगातार 5 दिन दी ड्यूटी
शिमला की डाॅ. सीमा सिंह पंवार प्रदेश की पहली महिला सर्जन हैं। सामान्य परिवार में जन्मी सीमा 2002 में प्रदेश की पहली महिला जनरल सर्जन बनीं। हिमाचल ही नहीं, पीजीआई चंडीगढ़ की पहली महिला कार्डियो सर्जन का खिताब भी डाॅ. सीमा के नाम है। डाॅ. सीमा सिंह ने बताया कि पीजी करते हुए बैच में केवल तीन लोग थे, जिसके चलते उन्हें दिन रात ड्यूटी करनी पड़ती थी, एक बार बुधवार से रविवार शाम तक लगातार 5 दिन ड्यूटी की। पीजीआई चंडीगढ़ की पहली कार्डियो सर्जन बनने के लिए छह महीने अपनी बेटी से भी दूर रहीं और मई 2014 में यह मुकाम हासिल किया। सीमा के पति टिकेंद्र सिंह नगर निगम के पूर्व उपमहापौर रह चुके हैं। सीमा की बेटी रोजा भी एमबीबीएस कर रही हैं।