लेकिन अपने जुनून और कड़ी मेहनत के दम पर उसने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का रोजगार हासिल कर लिया। मूलत: हरोली के लोअर बढेड़ा की रहने वाली पुष्पा देवी की शादी भदसाली के शशिपाल से हुई। पुष्पा बतौर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता क्षेत्र के बच्चों को अक्षर ज्ञान दे रही है।
पुष्पा की कहानी ऐसी बेटियों के लिए प्रेरणा बन रही है जो किसी न किसी रूप से अक्षम हैं या किसी हादसे की वजह से सामान्य जीवन नहीं जी पा रही हैं। दोनों हाथ न होने के बावजूद पुष्पा हर वो कार्य कर लेती, जो एक सामान्य इंसान करता है। वह अपने दोनों बाजुओं के सहारे पेन या चौक पकड़ कर लिखती है।
वहीं, खाना पकाना, कपड़े धोना और बर्तन साफ करना आदि कार्य भी बड़ी कुशलता से करती है। पुष्पा देवी का कहना है कि उसे महसूस नहीं होता कि वह दोनों हाथों से लाचार है। पुष्पा का कहना है कि व्यक्ति को कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। अपनी कमजोरी को ताकत बनाकर आगे बढ़ना चाहिए।